क्या 'भारत रत्न' नागरिकता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है?
शांतिनिकेतन । डेस्क: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के शांतिनिकेतन स्थित आवास 'प्रतीची' में निर्वाचन आयोग (EC) के अधिकारियों के साथ एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला. आयोग ने सेन की मतदाता सूची प्रविष्टियों में 'तार्किक विसंगति' का हवाला देते हुए एसआईआर (SIR) सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया था, जिस पर सेन के परिवार और शुभचिंतकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
सुनवाई के दौरान सेन के पारिवारिक मित्र गीतिकांठ मजूमदार ने व्यंग्य करते हुए अधिकारियों से पूछा कि क्या 'भारत रत्न' का प्रशस्ति पत्र, नागरिकता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं है?
उन्होंने इसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त व्यक्ति का मानसिक उत्पीड़न करार दिया.
हालांकि आयोग के अनाम सूत्रों का तर्क है कि खान अब्दुल गफ्फार खान और नेल्सन मंडेला जैसे विदेशियों को भी भारत रत्न मिला है, इसलिए इसे नागरिकता का एकमात्र आधार नहीं माना जा सकता.
विवाद का मुख्य कारण प्रोफेसर सेन और उनकी दिवंगत माता अमिता सेन की उम्र के बीच 15 वर्ष से कम का अंतर बताया गया था. इसके जवाब में सेन के परिवार ने 2002 की मतदाता सूची सहित उनके पासपोर्ट की प्रति जमा की है.
दस्तावेजों के अनुसार, 2002 में अमिता सेन की आयु 88 वर्ष थी और अमर्त्य सेन की आयु 69 वर्ष, जो 19 साल का स्पष्ट अंतर दर्शाती है.
शिक्षाविदों और स्थानीय निवासियों ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रशासनिक अक्षमता या जानबूझकर परेशान करने की कोशिश बताया है. फिलहाल, चुनाव आयोग के सूत्रों ने सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद मामले के सुलझ जाने की पुष्टि की है.