ईरान युद्ध मध्य-पूर्व को फिर से आकार देने का प्रयास- जेफ्री सैक्स
तेहरान । डेस्क: प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री और भू-राजनीतिक विश्लेषक जेफ्री सैक्स ने पश्चिम एशिया के वर्तमान संकट पर एक चौकाने वाला विश्लेषण प्रस्तुत किया है. टकर कार्लसन को दिए साक्षात्कार में सैक्स ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष कोई अचानक उपजी सुरक्षा मजबूरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'पसंद का युद्ध' (War of Choice) है. उनके अनुसार, इस युद्ध का वास्तविक उद्देश्य मध्य-पूर्व के मानचित्र और राजनीतिक ढांचे को अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप फिर से आकार देना है.
सैक्स ने तर्क दिया कि दशकों से चल रही इस योजना के पीछे क्षेत्रीय प्रभुत्व और 'ग्रेटर इजरायल' जैसी अवधारणाओं का हाथ है, जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रही हैं.
हालांकि, सैक्स ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस पूरे घटनाक्रम में ईरान को कमजोर करने की पश्चिमी और इजरायली रणनीति पूरी तरह विफल रही है. उनके विश्लेषण के अनुसार, बाहरी दबाव और सैन्य तनाव ने ईरान को पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली, संगठित और अनुभवी बना दिया है.
सैक्स ने कहा कि ईरान न केवल सैन्य रूप से मजबूत होकर उभरा है, बल्कि उसने क्षेत्रीय स्तर पर एक ऐसा समन्वय स्थापित कर लिया है जिसे भेदना अब नामुमकिन है. इसके अलावा, पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान को वैश्विक स्तर पर गैर-पश्चिमी शक्तियों के साथ अपने संबंधों को गहरा करने का मौका दिया है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक अपरिहार्य खिलाड़ी बन गया है.
सैक्स ने अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन का दृष्टिकोण अक्सर शक्तिशाली लॉबिंग नेटवर्क और विशिष्ट ऊर्जा हितों से संचालित होता है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है.
उन्होंने चेताया कि यदि इजरायल और अमेरिका अपनी मौजूदा नीति पर अड़े रहते हैं, तो यह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती साबित होगा.
फारस की खाड़ी में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान पूरी दुनिया को एक ऐसी आर्थिक मंदी में धकेल सकता है, जिससे उबरना नामुमकिन होगा. सैक्स का मानना है कि ईरान अब एक ऐसी क्षेत्रीय शक्ति है जिसे सैन्य बल से नहीं दबाया जा सकता और उसे नजरअंदाज करना भविष्य में भारी रणनीतिक भूल साबित होगी.
जेफ्री सैक्स कौन हैं?
जेफ्री सैक्स एक विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री, सार्वजनिक नीति विश्लेषक और सतत विकास के पैरोकार हैं, जिन्हें वर्तमान पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली विचारकों में गिना जाता है. कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत सैक्स ने दशकों तक वैश्विक गरीबी उन्मूलन, जलवायु परिवर्तन और ऋण राहत जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तीन महासचिवों कोफी अन्नान, बान की-मून और एंटोनियो गुटेरेस के विशेष सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं और वर्तमान में वे संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) के निदेशक हैं.
सैक्स की पहचान विशेष रूप से 1990 के दशक में पूर्वी यूरोप और रूस में साम्यवाद के पतन के बाद आर्थिक परिवर्तन के लिए अपनाई गई 'शॉक थेरेपी' रणनीति के वास्तुकार के रूप में हुई थी, हालांकि बाद के वर्षों में वे अमेरिकी विदेश नीति और बेलगाम वैश्वीकरण के कड़े आलोचक बनकर उभरे.
वे अपनी प्रसिद्ध पुस्तकों जैसे 'द एंड ऑफ पावर्टी' और 'कॉमन वेल्थ' के माध्यम से तर्क देते हैं कि वैश्विक गरीबी को रणनीतिक निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से समाप्त किया जा सकता है. सैक्स न केवल आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, बल्कि वे भू-राजनीति में पश्चिम, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका के हस्तक्षेपवादी दृष्टिकोण के मुखर विरोधी रहे हैं.
वे अक्सर यह तर्क देते हैं कि यूक्रेन संघर्ष, मध्य-पूर्व में तनाव और चीन के साथ बढ़ते मतभेद सैन्य समाधान के बजाय कूटनीति और बहुपक्षीय संवाद से हल होने चाहिए. उनके विचार अक्सर मुख्यधारा की पश्चिमी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विवाद का विषय बनते हैं, क्योंकि वे अमेरिकी आधिपत्य को वैश्विक अस्थिरता का एक बड़ा कारण मानते हैं और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करते हैं.
हार्वर्ड विश्वविद्यालय से मात्र 28 वर्ष की आयु में प्रोफेसर बनने वाले सैक्स को उनके मानवीय प्रयासों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को वैश्विक एजेंडे का हिस्सा बनाने के लिए दुनिया भर के कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है.
जेफ्री सैक्स का वर्तमान कार्य मुख्य रूप से जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार लाने और विकासशील देशों को उनके आर्थिक उत्थान में मदद करने पर केंद्रित है. वे डिजिटल समाचार मंचों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार सक्रिय रहते हैं, जहाँ वे अक्सर वैश्विक शांति और पर्यावरणीय स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हैं.