होर्मुज में ईरान ने लगाया 'टोल टैक्स', वैश्विक महामंदी का खतरा
तेहरान । डेस्क: मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है.
ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग की वास्तविक नाकेबंदी और जहाजों से 'टोल' वसूलने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो दुनिया दशकों के सबसे खराब ऊर्जा संकट और एक गंभीर वैश्विक मंदी की चपेट में आ सकती है.
ऊर्जा संकट और आसमान छूती कीमतें
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग से तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ले जाने वाले जहाजों का रास्ता रोक दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है.
इस संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो युद्ध पूर्व की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि है.
विशेष रूप से एशियाई देशों में ईंधन की राशनिंग शुरू हो गई है और औद्योगिक उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है.
ईरानी संसद का नया कानून और 'टोल बूथ' सिस्टम
ईरानी मीडिया के अनुसार, देश की संसद (मजलिस) एक ऐसा कानून लाने की तैयारी में है जिसके तहत होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा शुल्क या 'टोल' वसूला जाएगा. अधिकारियों का तर्क है कि चूंकि ईरान इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, इसलिए अन्य अंतरराष्ट्रीय गलियारों की तरह यहां भी शुल्क लिया जाना 'पूरी तरह से प्राकृतिक' है.
हालांकि, आधिकारिक कानून बनने से पहले ही ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अनौपचारिक 'टोल बूथ' प्रणाली लागू कर दी है.
लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में कई जहाजों को IRGC द्वारा निर्धारित रूट और जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है.
कैसे काम करता है ईरान का जांच तंत्र?
इस नई व्यवस्था के तहत, जहाज ऑपरेटरों को IRGC से जुड़े मध्यस्थों के माध्यम से अपने जहाज का पूरा विवरण साझा करना होता है.
इसमें जहाज का IMO नंबर, माल की प्रकृति, चालक दल के सदस्यों के नाम और अंतिम गंतव्य जैसी जानकारी शामिल होती है. IRGC की नौसेना कमान इस डेटा की जांच करती है और क्लीयरेंस कोड जारी करती है. जलडमरूमध्य में प्रवेश करने पर, IRGC कमांडर रेडियो के माध्यम से यह कोड मांगते हैं.
अनुमति मिलने पर ही ईरानी नावें जहाज को सुरक्षा घेरे में लेकर उनके क्षेत्रीय जल क्षेत्र से बाहर निकालती हैं. जो जहाज इस प्रक्रिया का पालन नहीं करते, उन्हें वापस लौटा दिया जाता है.
अवैध वसूली और चुनिंदा देशों को छूट
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह मार्ग अमेरिका और उसके सहयोगियों को छोड़कर सभी के लिए खुला है.
ईरान ने मलेशिया, चीन, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे 'मित्र देशों' के जहाजों को गुजरने की अनुमति देने की बात कही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ चीनी जहाजों ने चीनी मुद्रा 'युआन' में भुगतान करके इस मार्ग का उपयोग किया है.
हालांकि, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह के भुगतान की बात से इनकार किया है और नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर दिया है. दूसरी ओर, ईरानी सांसदों का दावा है कि युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक वसूले जा रहे हैं.
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
समुद्री कानून के जानकारों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) की धारा 38 के तहत सभी जहाजों को 'ट्रांजिट पैसेज' का अधिकार है, जिसे कोई देश निलंबित नहीं कर सकता.
हालांकि, ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन अपनी संसद से इसे अनुमोदित (Ratify) नहीं कराया है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने से इनकार करता रहा है.
जानकारों का तर्क है कि व्यावसायिक यातायात को रोकना या ट्रांजिट फीस वसूलना 'अवैध आर्थिक युद्ध' की श्रेणी में आता है. संयुक्त अरब अमीरात की ADNOC जैसी बड़ी कंपनियों ने ईरान के इस कदम को "आर्थिक आतंकवाद" करार दिया है.
फंसे हुए जहाज और वैश्विक चिंता
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, वर्तमान में लगभग 2,000 जहाज जलडमरूमध्य के दोनों ओर फंसे हुए हैं. कई ऑपरेटरों ने लंबे और महंगे वैकल्पिक रास्तों को चुनने के बजाय वहीं रुककर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना बेहतर समझा है.
इसी बीच, क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब इजरायल ने दावा किया कि उसने IRGC नौसेना के शीर्ष कमांडर अलीरेज़ा तंगसिरी को एक हवाई हमले में मार गिराया है.
यदि तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'कयामत की घड़ी' (Doomsday) शुरू हो सकती है.