भारतीय स्मार्टफोन- सोशल मीडिया पर अमेरिका का कंट्रोल, प्लान B क्या है?
नई दिल्ली । डेस्क: क्या होगा अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत में अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल, और चैटजीपीटी के इस्तेमाल पर रोक लगा दें? क्या भारतीय लोग अचानक इन्हें इस्तेमाल करना बंद कर देंगे? यह सवाल आजकल भारत के उद्योग जगत और आम लोगों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है.
यह चर्चा तब शुरू हुई जब जाने-माने उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि हमें गंभीरता से सोचना चाहिए कि अगर ट्रंप ऐसा करते हैं तो इसके क्या नतीजे होंगे और हमारे पास 'प्लान बी' (वैकल्पिक योजना) क्या है.
हम सभी जानते हैं कि हमारे स्मार्टफोन या कंप्यूटर एंड्रॉइड या iOS पर चलते हैं, और ये दोनों ही अमेरिकी कंपनियों द्वारा चलाए जाते हैं. भारत में अपना कोई ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है और हम जिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं, उन पर भी अमेरिका का ही कंट्रोल है.
इस डर के माहौल में, एक और बड़े उद्योगपति और टेक्नोलॉजी कंपनी ज़ोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अपनी राय दी. उन्होंने गोयनका की बात से सहमति जताई और कहा कि हमारी निर्भरता सिर्फ सोशल मीडिया ऐप्स तक ही सीमित नहीं है. हम ऑपरेटिंग सिस्टम और माइक्रोचिप जैसी ज़रूरी चीज़ों के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर हैं.
वेम्बु ने सलाह दी है कि भारत को इस डिजिटल कमजोरी को दूर करने के लिए एक '10 साल का राष्ट्रीय मिशन' शुरू करना चाहिए. उनका मानना है कि अगर हमें सचमुच तकनीकी रूप से आज़ाद होना है, तो सिर्फ ऐप बनाने पर नहीं, बल्कि चिप्स और बुनियादी टेक्नोलॉजी में भी निवेश करना होगा.
विशेषज्ञों ने भी बार-बार चेतावनी दी है कि गूगल, मेटा (फेसबुक) और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर रोक लगने से भारत में कम्युनिकेशन, ऑनलाइन बैंकिंग और ज़रूरी डिजिटल सेवाएं ठप हो सकती हैं.
इसलिए, कई लोग वेम्बु की बात से सहमत हैं कि भारत के लिए अब तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनना सिर्फ अच्छी बात नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है. हालांकि, कुछ लोग इसे मुश्किल भी मान रहे हैं.