भारत ब्रिक्स करेंसी के पक्ष में नहीं
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा भारत ब्रिक्स करेंसी के पक्ष में नहीं है. भारत अपनी मुद्रा को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स समूह के लिये अलग करेंसी बनाने पर कोई काम नहीं हो रहा है.
"भारत अपनी मुद्रा को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रहा है. अमरीकी डॉलर अभी भी वैश्विक व्यापार में प्रमुख है और लंबे समय तक रहेगा. भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ रुपये में व्यापार का समझौता किया है और मालदीव के साथ भी इस तरह की व्यवस्था पर विचार कर रहा है," मल्होत्रा ने कहा.
क्रिप्टोकरेंसी के नियमन पर बोलते हुये मल्होत्रा ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति इस मुद्दे पर विचार करेगी, जिसमें आरबीआई की चिंताओं को ध्यान में रखा जायेगा.
इसी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत किया है और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. इस समझौते से वित्त, प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और सेवा क्षेत्रों में नये अवसर खुलेंगे.
मल्होत्रा ने शुक्रवार को एक उद्योग आयोजन में कहा, "यह समझौता हमारे विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा देगा. यह भारत के लिये एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था कमजोर पड़ रही है."
गौरतलब है कि भारत और यूनाइटेड किंगडम ने गुरुवार को इस व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस सप्ताह मंजूरी दी थी. यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को प्रतिवर्ष 34 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने की उम्मीद है.
गवर्नर मल्होत्रा ने इस अवसर पर कहा कि भारत को अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते करने चाहिये. उन्होंने बताया कि संयुक्त राज्य अमरीका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत "उन्नत चरण" में है. इसके अलावा, कई अन्य व्यापार समझौतों पर भी चर्चा चल रही है.