रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

भारत: जमीन और निर्माण लागत में भारी उछाल से होम बायर्स और डेवलपर्स दोनों पस्त

C

CG Khabar

04 सित. 2026, 07:32 AM 4 मिनट में पढ़ें 3

मकान-जमीन के बढ़ते दाम
मकान-जमीन के बढ़ते दाम

नई दिल्ली । डेस्क: देश के बड़े महानगरों में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे आम लोगों और मध्य वर्ग के लिए राह बेहद मुश्किल होती जा रही है. साल 2021 से 2026 के बीच भारत के सात प्रमुख शहरों में रिहायशी मकानों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. संपत्ति की लागत में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने एक तरफ जहां बजट और मध्यम आय वर्ग के खरीदारों को बाजार से बाहर धकेल दिया है, वहीं दूसरी तरफ जमीन के बढ़ते दाम और निर्माण सामग्री की महंगी दरों ने बिल्डर्स तथा डेवलपर्स की कमाई पर भारी चोट पहुंचाई है.


सात बड़े शहरों में जमीन के दामों में 120 प्रतिशत तक की आग


प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, पुणे, चेन्नई और हैदराबाद जैसे सात सबसे बड़े हाउसिंग मार्केट में जमीन के मूल्यों में 50 प्रतिशत से लेकर 120 प्रतिशत तक का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है. यह सालाना आधार पर औसतन 8 से 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. सबसे ज्यादा तेजी देश के टेक और प्रशासनिक केंद्रों में देखी गई है, जहां बेंगलुरु में जमीन की कीमतें 60 से 120 प्रतिशत और दिल्ली-एनसीआर में 70 से 130 प्रतिशत तक बढ़ी हैं. बुनियादी ढांचे के विकास, नई मेट्रो लाइनों, एक्सप्रेसवे और कमर्शियल हब्स के विस्तार ने बाहरी इलाकों की जमीनों के दाम भी रातों-रात बढ़ा दिए हैं.

विज्ञापन


वैश्विक तनाव और आयातित सामानों ने बढ़ाया निर्माण का बोझ


जमीन के अलावा निर्माण लागत में हुई भारी बढ़ोतरी ने डेवलपर्स की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं. महामारी के बाद स्टील और ईंधन आधारित उत्पादों के महंगे होने से शुरू हुआ यह सिलसिला अब अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों के कारण और गहरा गया है. मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और जहाजरानी मार्गों में व्यवधान के चलते कांच, टाइल्स और फिनिशिंग मटीरियल जैसे आयातित सामान लंबे समुद्री रास्तों से भारत पहुंच रहे हैं. इससे मालभाड़ा और बीमा प्रीमियम काफी बढ़ गया है. इसके साथ ही, स्टील निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की किल्लत और बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागतों ने कुल निर्माण खर्च में अतिरिक्त 8 से 10 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है. हालांकि, कुल प्रोजेक्ट लागत का बड़ा हिस्सा रहने वाले श्रम और सीमेंट की दरों में केवल 4 से 5 प्रतिशत की ही मामूली बढ़त हुई है.


प्रति वर्ग फुट औसत दरों में 59 फीसदी की ऐतिहासिक तेजी


जमीन के अधिग्रहण और निर्माण सामग्री के इस दोहरे दबाव का सीधा असर मकानों की अंतिम कीमतों पर पड़ा है. वर्ष 2021 में इन सात प्रमुख शहरों में औसत रिहायशी मकानों का मूल्य 5,826 रुपये प्रति वर्ग फुट था, जो 2026 की पहली छमाही तक बढ़कर 9,260 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गया है. आंकड़ों के मुताबिक, एक प्रोजेक्ट की कुल लागत में निर्माण खर्च की हिस्सेदारी लगभग 66 प्रतिशत होती है, जबकि जमीन की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत के आसपास बैठती है.


डेवलपर्स के सामने दोहरी चुनौती: मार्जिन में कटौती या बिक्री में गिरावट


बढ़ती लागत ने डेवलपर्स को एक असहज स्थिति में ला खड़ा किया है. नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में तो बिल्डर्स बढ़ी हुई लागत को बिक्री मूल्य में जोड़कर ग्राहकों पर डाल सकते हैं, लेकिन जो प्रोजेक्ट्स पहले ही लॉन्च होकर बिक चुके हैं, वहां खरीदारों से अतिरिक्त पैसों की मांग करना मुमकिन नहीं है. ऐसे में डेवलपर्स को अपना मुनाफा घटाकर इस नुकसान को खुद ही सहन करना पड़ रहा है. दूसरी ओर, नए प्रोजेक्ट्स में कीमतें बढ़ाने पर ग्राहकों के पीछे हटने का बड़ा खतरा बना हुआ है.


प्रीमियम सेगमेंट की रफ्तार बरकरार, किफायती आवास पर लगा ग्रहण


बाजार के इस संकट का असर सभी वर्गों पर एक समान नहीं पड़ा है. लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में अमीर खरीदार बढ़ी हुई कीमतों को आसानी से स्वीकार कर रहे हैं, जिससे इस वर्ग में मांग बनी हुई है. इसके विपरीत, किफायती और मध्यम आय वर्ग की स्थिति काफी चिंताजनक है. यहां मकान की कीमत में थोड़ा सा भी इजाफा बजट को बिगाड़ देता है और होम लोन की किश्तों को पहुंच से बाहर कर देता है. इस स्थिति से निपटने के लिए डेवलपर्स अब संभलकर कीमतें बढ़ाने, मकानों के आकार और डिजाइन में बदलाव करने तथा नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग को धीमा करने की रणनीति अपना रहे हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP