संबंधों को अतीत की सीमा विवाद से परिभाषित न करें: चीनी राजदूत
नई दिल्ली । डेस्क: चीनी राजदूत शू फीहोंग ने कहा कि हाल ही में तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में "नई प्रगति" देखी गई है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को सीमा विवाद को द्विपक्षीय संबंधों को परिभाषित करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए.
दिल्ली में चीन के राष्ट्रीय दिवस समारोह के अवसर पर बोलते हुए, शू फीहोंग ने कहा कि इस वर्ष कम्युनिस्ट पार्टी सरकार के 76 वर्ष और भारत-चीन राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस दौरान उच्च-स्तरीय मुलाकातों और जन-जन के बीच संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. समारोह में विदेश मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार चटर्जी भी मौजूद थे.
शू ने कहा कि पिछले एक साल में मोदी और शी की दो बार मुलाकात हुई है, और दोनों पक्षों ने चार साल के सैन्य गतिरोध के बाद उड़ानों, वीजा और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों को बहाल करने पर सहमति जताई है.
उन्होंने कहा, "संवाद के माध्यम से मतभेदों को दूर करना हमेशा भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण कुंजी रहा है."
उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को "अतीत से चले आ रहे सीमा प्रश्न को वर्तमान भारत-चीन संबंधों को परिभाषित करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, न ही विशिष्ट मतभेदों को व्यापक द्विपक्षीय सहयोग को प्रभावित करने देना चाहिए."
गौरतलब है कि LAC पर सैन्य गतिरोध के दौरान, नई दिल्ली ने कहा था कि सीमा पर सामान्य स्थिति के बिना सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं.
शू ने कहा, "पिछले 75 वर्षों में, उतार-चढ़ाव के बावजूद, संबंध मुख्य रूप से मैत्रीपूर्ण सहयोग से परिभाषित रहे हैं."
उन्होंने बताया कि 2025 में चीनी दूतावास ने 2,65,000 भारतीय नागरिकों को वीजा जारी किया और कैलाश-मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया, जिसके तहत 700 आधिकारिक तीर्थयात्री और 20,000 निजी तीर्थयात्री इस वर्ष यात्रा पर गए.
उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी से अगस्त के बीच, दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 10.4% बढ़कर 102 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
यह बयान मोदी की 30 अगस्त को चीन यात्रा के बाद शू के पहले सार्वजनिक बयान थे, जो सात साल बाद उनकी पहली चीन यात्रा थी.
पिछले महीने, शू ने अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की आलोचना की थी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत को चीन के समर्थन की बात कही थी.
भारत और अमेरिका ने तब से व्यापार वार्ता फिर से शुरू की है, हालांकि अमेरिकी टैरिफ वापस नहीं लिए गए हैं.
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए, जिसमें मोदी ने भाग लिया था, शू ने कहा कि शी जिनपिंग ने "वैश्विक शासन पहल" प्रस्तावित की है, जो "संप्रभु समानता, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, बहुपक्षवाद और जन-केंद्रित दृष्टिकोण" को बढ़ावा देती है.