संसद के विशेष सत्र पर विपक्षी दलों की बैठक आज
नई दिल्ली | डेस्क: इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी इंडिया गठबंधन के नेता मंगलवार दोपहर दिल्ली में एक अहम बैठक कर सकते हैं, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है कि वह संसद का विशेष सत्र बुलाए. इस विशेष सत्र में पहलगाम आतंकी हमले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उससे जुड़े घटनाक्रमों के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को लेकर मध्यस्थता के दावे पर चर्चा हो सके.
इस बैठक के ज़रिए विपक्ष एकजुट होकर सरकार को स्पष्ट संदेश देना चाहता है. अधिकांश दलों ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. विपक्ष ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि सरकार विदेशी देशों को बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों के ज़रिए जानकारी दे रही है, जबकि भारतीय संसद को जानकारी देने में हिचक रही है.
बैठक में प्रमुख दलों के नेता शामिल होंगे और वे इस मुद्दे को और प्रभावी ढंग से उठाने के लिए रणनीति बनाएंगे. सूत्रों के अनुसार, विपक्षी गठबंधन अपने सभी सांसदों के हस्ताक्षर इकट्ठा कर प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजने की योजना बना रहा है और इस पर अंतिम निर्णय बैठक में लिया जा सकता है.
हालांकि, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) इस बैठक में शामिल नहीं होगी क्योंकि पार्टी प्रमुख शरद पवार पहले ही संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर अपनी आपत्ति जता चुके हैं. उन्होंने कहा था कि यह एक "संवेदनशील और गंभीर मुद्दा" है और इसे संसद में उठाना "संभव नहीं" है. पवार ने इसके बजाय सभी दलों की एक बैठक बुलाने का समर्थन किया था. लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल और 8 मई को हुई दोनों सर्वदलीय बैठकों में शामिल नहीं हुए, जबकि उनसे इसमें शामिल होने की मांग की गई थी.
विपक्ष सरकार के उस रुख पर भी सवाल उठा रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संवाद तो किया गया, लेकिन न तो संसद को भरोसे में लिया गया और न ही देश की जनता को पूरी जानकारी दी गई.
22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा व्यापार के ज़रिए संघर्ष विराम लागू करने का दावा, और रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान द्वारा लड़ाकू विमान के नुकसान पर की गई टिप्पणी जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. उनका आरोप है कि इस पूरे मामले में न केवल राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल किया गया, बल्कि इसे सांप्रदायिक रंग भी दिया गया.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा सांसद राहुल गांधी, और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विशेष सत्र की मांग की है. सोमवार को आरजेडी के वरिष्ठ सांसद मनोज के झा ने भी एक और पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को देश को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए और संसद को रणनीतिक उद्देश्यों, सैन्य अभियानों के परिणामों और भविष्य की नीति पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए - क्योंकि संसद "ऐसे ही राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों के लिए बनी है."
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी, डीएमके, समाजवादी पार्टी, सीपीआईएम, सीपीआई और सीपीआई(एमएल) (लिबरेशन) जैसे कई दलों ने भी विशेष सत्र की मांग की है. सूत्रों का कहना है कि एक साझा पत्र तैयार किया गया है, जिसे विपक्षी सांसदों के बीच हस्ताक्षरों के लिए साझा किया गया है. इसका उद्देश्य "संयुक्त और तत्काल अनुरोध" के रूप में विशेष सत्र बुलाने की मांग को मजबूत करना है.