'कार्बाइड गन' पर MP में प्रतिबंध
'कार्बाइड गन' पर MP में तत्काल प्रतिबंध, सीएम बोले- ज़ीरो टॉलरेंस
भोपाल । डेस्क: मध्यप्रदेश में 'कार्बाइड गन' पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. दिवाली के दौरान स्थानीय रूप से बनी 'कार्बाइड गन' के उपयोग से बच्चों और अन्य नागरिकों को गंभीर आँख की चोटें लगने की कई घटनाओं के बाद, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में इन उपकरणों के अवैध निर्माण, बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है.
मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों को "घातक विस्फोटक उपकरण" बताते हुए कहा कि ये नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं, और इनके खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.
डॉ. यादव ने भोपाल के हमीदिया अस्पताल जाकर घायल मरीजों से मुलाकात की. डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि 37 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 35 को छुट्टी दे दी गई है, जबकि गंभीर आँख की चोटों के लिए दो मरीज अभी भी इलाज करा रहे हैं. राज्य भर में दिवाली पर इन गन के उपयोग से 200 से अधिक हल्के से गंभीर आँख की चोटों के मामले सामने आए हैं.
मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को घायल बच्चों और नागरिकों के उपचार में कोई लापरवाही न बरतने और सर्जरी तथा आँखों की देखभाल सहित चिकित्सा सेवाओं को उच्चतम प्राथमिकता पर प्रदान करने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मरीजों को इलाज के लिए 'मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष' से सहायता प्रदान की जाए.
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि 'कार्बाइड गन' खिलौने नहीं, बल्कि 'विस्फोटक उपकरण' हैं. उन्होंने आर्म्स एक्ट, 1959, एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट, 1908 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया. ये उपकरण एसिटिलीन गैस विस्फोट से तेज आवाज और दबाव तरंगें उत्पन्न करते हैं, जिससे गंभीर चोटें, जलन और स्थायी नेत्र क्षति हो सकती है.
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इनके निर्माण या बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए. उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन बिक्री को रोकने के लिए साइबर शाखा को निगरानी रखने का भी निर्देश दिया.
राज्य पुलिस मुख्यालय (PHQ) के अनुसार, अब तक कार्बाइड गन के संबंध में भोपाल में छह, विदिशा में आठ और ग्वालियर में एक FIR दर्ज की गई है. PHQ के सर्कुलर में कहा गया है कि बिना लाइसेंस के इन गन का निर्माण, बिक्री, या कब्ज़ा तीन से सात साल की कैद और जुर्माने से दंडनीय है.