क्यों मिला लास्लो क्रास्ज़नाहोरकाई को नोबेल
स्टॉकहोम | डेस्क: इस वर्ष का साहित्य का नोबेल पुरस्कार हंगरी के विशिष्ट लेखक लास्लो क्रास्ज़नाहोरकाई (László Krasznahorkai) को प्रदान किया गया है. स्वीडिश अकादमी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि क्रास्ज़नाहोरकाई का लेखन "प्रेरक और दूरदर्शी है, जो सर्वनाशी भय के बीच भी कला की ताक़त (Power of Art) को फिर से पुष्ट करता है."
अकादमी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा-"क्रास्नाहोरकाई की कृतियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि जब सभ्यता डगमगाने लगती है, जब भय और अराजकता जीवन के हर पहलू में समा जाती है, तब भी कला वह शक्ति है जो मानवता को आत्मविनाश से बचा सकती है."
दस लाख डॉलर से ज़्यादा की राशि वाले इस पुरस्कार की खबर मिलने के बाद क्रास्ज़नाहोरकाई ने रेडियो स्वीडन से कहा, "मैं शांत और बहुत घबराया हुआ हूँ. यह मेरे जीवन का पहला दिन है जब मुझे नोबेल पुरस्कार मिला है. मुझे नहीं पता कि भविष्य में क्या होने वाला है."
क्रास्ज़नाहोरकाई को उनके काम के लिए 2015 का मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और 2019 में बैरन वेंकहेम की होमकमिंग के लिए अमेरिका में अनुवादित साहित्य के लिए राष्ट्रीय पुस्तक पुरस्कार मिला था.
उन्होंने कहा कि उनका कोई भी कैरियर योजनाबद्ध नहीं था.
"मैं शुरू में सिर्फ़ एक किताब लिखना चाहता था. और मैं लेखक नहीं बनना चाहता था," उन्होंने स्वीडिश रेडियो को बताया, लेकिन अपने पहले उपन्यास को दोबारा पढ़ने पर उन्हें पता चला कि वह संपूर्ण नहीं था.
उन्होंने कहा, "मैंने एक और किताब लिखना शुरू किया क्योंकि मैं 'सैटानटैंगो' को सही करना चाहता था," और बाद में "मैंने पहले दो को सही करने के लिए एक नई किताब लिखने की कोशिश की. ... मेरा जीवन एक स्थायी सुधार है."
71 साल के लास्लो क्रास्ज़नाहोरकाई उन कुछ लेखकों में हैं, जिन्होंने 20वीं सदी के उत्तरार्ध और 21वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय साहित्य को नया स्वर और नई संवेदना दी. उनके लेखन में विनाश, आध्यात्मिकता, अकेलापन और सभ्यता के पतन जैसे विषय बार-बार उभरते हैं- लेकिन इन अंधकारमय परिवेशों के भीतर वे आशा, विश्वास और सौंदर्य की खोज करते हैं.
उनकी पहली कृति Satantango (1985) ने उन्हें हंगरी के साहित्यिक जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई. यह उपन्यास समाज के पतन और मानव अस्तित्व के विघटन को अत्यंत जटिल और लंबी वाक्य-रचना में व्यक्त करता है. उनकी दूसरी प्रमुख रचना The Melancholy of Resistance (1989) में वे यह दिखाते हैं कि किस प्रकार सत्ता, भीड़ और भय किसी समाज की नैतिकता को निगल जाते हैं.
इसके बाद आई War and War (1999) और "Seiobo There Below (2008) जैसी कृतियाँ उनके लेखन को एक दार्शनिक और वैश्विक विस्तार प्रदान करती हैं. Seiobo There Below में क्रास्नाहोरकाई कला और सृष्टि के बीच के रहस्यमय संबंध को तलाशते हैं- यह रचना उन्हें 2015 में Man Booker International Prize भी दिला चुकी है.
शब्दों की लंबी यात्रा और अंतर्मुखी दृष्टि
क्रास्ज़नाहोरकाई की भाषा शैली अत्यंत अनूठी मानी जाती है- वे अक्सर लंबे, अविरल वाक्य लिखते हैं जो एक ही सांस में विचार, दृश्य और भावना को जोड़ते चलते हैं. उनकी रचनाओं में काफ्का, दॉस्तोयेव्स्की और थॉमस बर्नहार्ड जैसी परंपराओं की छाया तो दिखाई देती है, परंतु उनका स्वर पूरी तरह स्वतंत्र और रहस्यमय है.
आलोचकों का मानना है कि उनका साहित्य "अंत समय का आख्यान" है, जहाँ हर पात्र सभ्यता के मलबे के बीच अर्थ खोजने की कोशिश करता है. किंतु इसी खोज में लेखक मानवता के प्रति गहरे करुण भाव से भर उठते हैं.
स्वीडिश अकादमी के अनुसार, क्रास्ज़नाहोरकाई की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने कला को नैतिक साहस का प्रतीक बना दिया. उनके लेखन में निराशा के बीच भी यह अटूट विश्वास दिखाई देता है कि "कला ही वह माध्यम है जो मनुष्य को अपने भय और अस्थिरता से मुक्त कर सकती है."
नोबेल समिति के अध्यक्ष के शब्दों में, "क्रास्ज़नाहोरकाई का लेखन एक चेतावनी भी है और एक सांत्वना भी- वे हमें बताते हैं कि जब सब कुछ समाप्त होता प्रतीत होता है, तब भी सृजन का अर्थ जीवित रहता है."
क्रास्ज़नाहोरकाई की कई रचनाओं पर हंगरी के प्रसिद्ध फिल्मकार बेला टार ने फिल्में बनाई हैं- जिनमें "Satantango" और "The Turin Horse" प्रमुख हैं. उनके लेखन का प्रभाव न केवल यूरोप में, बल्कि अमेरिका, जापान और लैटिन अमेरिका तक महसूस किया गया है.
वह कृति जिसने दिलाया साहित्य का नोबेल
अमेरिकी लेखिका और आलोचक सुसान सॉनटैग ने एक बार लास्लो क्रास्ज़नाहोरकाई को "सर्वनाश का समकालीन उस्ताद" कहा था. उनकी रचनाओं में फ्रांज काफ्का और सैमुअल बेकेट जैसे यूरोपीय लेखकों की झलक मिलती है, वे लेखक जिन्होंने मानव अस्तित्व के बेतुके दुखांत-हास्य और निरर्थकता की गहराई से पड़ताल की.
ग्लासगो विश्वविद्यालय में हंगेरियन साहित्य की विशेषज्ञ ज़ुज़्साना वर्गा का कहना है कि क्रास्ज़नाहोरकाई के उपन्यास "मानव अस्तित्व की पूर्ण निराशा" को उघाड़ते हैं, लेकिन साथ ही वे "अविश्वसनीय रूप से व्यंग्यपूर्ण और हास्यपूर्ण" भी हैं.
उनकी विशिष्ट लेखन शैली, लगभग अंतहीन, प्रवाहमयी वाक्यों की लंबी श्रृंखला, ने उनके साहित्य को आलोचकों के बीच "होटल कैलिफ़ोर्निया" जैसी उपमा दिलाई है. वर्गा कहती हैं, "एक बार पाठक उनके लेखन में प्रवेश कर जाए, तो फिर निकल पाना लगभग असंभव है, आप कभी नहीं छोड़ सकते."
वर्गा के अनुसार, नए पाठकों को क्रास्ज़नाहोरकाई की 1985 में प्रकाशित पहली कृति "सैटानटैंगो" (Satantango) से शुरुआत करनी चाहिए. यह उपन्यास एक मरते हुए सामूहिक खेत (कोऑपरेटिव फार्म) के बचे हुए निवासियों की कथा कहता है, जो उनके आगे के समूचे लेखन का भावनात्मक और प्रतीकात्मक आधार बनता है.
इसके बाद उन्होंने 20 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें "The Melancholy of Resistance" (प्रतिरोध की उदासी) विशेष रूप से प्रसिद्ध है, यह एक यात्रा करने वाले सर्कस और एक भरवां व्हेल के इर्द-गिर्द बुनी गई अवास्तविक और विचलित करने वाली कथा है. वहीं "Baron Wenckheim’s Homecoming" एक जुए के आदी कुलीन व्यक्ति के जीवन पर आधारित एक विस्तृत सामाजिक गाथा है.
2021 में प्रकाशित "Herscht 07769" क्रास्ज़नाहोरकाई की नवीनतम कृतियों में से एक है, जो एक अशांत जर्मन नगर की पृष्ठभूमि पर आधारित है. यह पुस्तक तत्कालीन जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को लिखे गए काल्पनिक पत्रों के रूप में रची गई है, और इसकी विशेषता यह है कि इसके पूरे 400 पृष्ठों में केवल एक ही पूर्ण विराम (बिंदु) है.
क्रास्ज़नाहोरकाई की कई प्रसिद्ध रचनाएँ, जैसे "Satantango" और "The Melancholy of Resistance", हंगरी के प्रसिद्ध फिल्मकार बेला टार ने फिल्मों में रूपांतरित कीं.
उन्होंने अपने एशियाई प्रवासों, विशेषकर चीन और जापान की यात्राओं, से प्रेरित होकर कई कृतियाँ लिखीं. इनमें 2003 में प्रकाशित "उत्तर की ओर एक पर्वत, दक्षिण की ओर एक झील, पश्चिम की ओर एक नदी, पूर्व की ओर एक नदी" उल्लेखनीय है, जो पूर्वी दर्शन और सौंदर्यबोध से प्रभावित है.
क्रास्ज़नाहोरकाई की जीत क्यों महत्वपूर्ण है
नोबेल समिति के सदस्य स्टीव सेम-सैंडबर्ग ने कहा कि क्रास्ज़नाहोरकाई "कई वर्षों से इस पुरस्कार के प्रमुख दावेदारों में थे". उन्होंने उनके साहित्यिक कार्य को "लगभग आधी सदी की विशुद्ध उत्कृष्टता" बताया.
1954 में हंगरी के दक्षिण–पूर्वी शहर ग्युला में जन्मे क्रास्ज़नाहोरकाई ने सेगेद और बुडापेस्ट विश्वविद्यालयों में कानून की पढ़ाई की, जिसके बाद वे पूरी तरह साहित्य की ओर उन्मुख हो गए.
ज़ुज़्साना वर्गा बताती हैं कि 1980 के दशक में साम्यवाद के अंतिम दौर में वे युवा हंगेरियाई पाठकों के बीच एक "पंथ-प्रसिद्धि" हासिल कर चुके थे, "उस दौर में लेखक लगभग पॉप स्टार जैसे होते थे."
बुडापेस्ट स्थित मैग्वेटो प्रकाशन गृह के संपादक जानोस सेगो के अनुसार, क्रास्ज़नाहोरकाई की रचनाएँ "परिधीय जीवन" और "शक्ति की तकनीकों" पर केंद्रित हैं. सेगो का कहना है,
"हमारे समय की सभी लोकलुभावन प्रवृत्तियाँ, बर्बरता से लेकर जन-भावनाओं के शोषण तक, उनके उपन्यासों में गहराई से परिलक्षित होती हैं."
क्रास्ज़नाहोरकाई अपने देश के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की नीतियों के प्रखर आलोचक रहे हैं, विशेषकर रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद हंगरी सरकार द्वारा यूक्रेन को सीमित समर्थन देने पर.
इस वर्ष की शुरुआत में स्वीडिश समाचारपत्र स्वेन्स्का डागब्लाडेट को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था -
"आज हंगरी में कोई उम्मीद नहीं बची है, और इसकी वजह केवल ओर्बन शासन नहीं है. समस्या सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक भी है."
2025 का यह सम्मान उन्हें केवल एक लेखक के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक युग के दार्शनिक साक्षी के रूप में स्थापित करता है. नोबेल पुरस्कार के साथ उन्हें स्वर्ण पदक, एक प्रमाणपत्र और लगभग 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (करीब 8 लाख डॉलर) की राशि प्रदान की जाएगी. समारोह परंपरानुसार 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में आयोजित होगा.