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'डिजिटल अरेस्ट' का बढ़ता आतंक: बिना OTP लाखों की ठगी

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12 नव. 2025, 05:19 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

Digital Arrest
Digital Arrest

नई दिल्ली । डेस्क: हाल ही में छत्तीसगढ़ में कई लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' करके लाखों रुपये लूट लिये गये. ऑनलाइन धोखाधड़ी की दुनिया में इन दिनों 'डिजिटल अरेस्ट' ने आतंक मचा रखा है. ठग अब लोगों को ओटीपी मांगने की ज़रूरत महसूस नहीं करते, बल्कि फोन पर ही 'गिरफ्तारी' का डर दिखाकर लाखों रुपये लूट रहे हैं. इस धोखाधड़ी के मुख्य शिकार बुजुर्ग और प्रतिष्ठित नागरिक हैं, जिनकी डिजिटल माध्यमों में कम जानकारी का फायदा उठाया जा रहा है. 


यह गिरोह थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से चलाया जा रहा है. भारत के विभिन्न हिस्सों से धोखेबाजों को इन देशों में ले जाया जाता है, जहां से वे भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते हैं और सफलतापूर्वक ठगी गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल लेते हैं.

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क्या है डिजिटल अरेस्ट?

डिजिटल अरेस्ट वह तरीका है, जिसमें धोखाधड़ी करने वाले खुद को पुलिस, सीबीआई, एनआईए, या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं. वे फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर या अवैध पार्सल, आधार कार्ड का दुरुपयोग, या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे झूठे आरोप लगाकर पैसे ऐंठते हैं.


साइबर विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि पुलिस कभी भी डिजिटल माध्यम (जैसे WhatsApp, Skype, या वीडियो कॉल) से किसी को गिरफ्तार नहीं करती. किसी भी गिरफ्तारी के लिए अधिकारी को शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है. यदि कोई फोन करके खुद को पुलिस बताता है और आपको लाइन पर बने रहने या किसी एकांत जगह पर वीडियो कॉल करने को कहता है, तो वह 100% फर्जी है.


ठगी के तरीके

*कूरियर कंपनी या बैंक अधिकारी बनकर फोन करना और अवैध पार्सल या अनियमित लेनदेन की बात कहना.

*आधार/पैन कार्ड के दुरुपयोग का आरोप लगाना और तुरंत गिरफ्तारी या अकाउंट फ्रीज करने की धमकी देना.

*नकली एफआईआर या केस नंबर वीडियो कॉल पर दिखाना और पैसे की मांग करना.

*+65, +971, या +852 जैसे विदेशी नंबरों से कॉल आना.

*यह कहना कि "आपके नाम पर गिरफ्तारी वारंट है" या "इस फोन कॉल की बात किसी को न बताएं."


बचाव के लिए क्या करें?

यदि कोई अधिकारी फर्जी पहचान पत्र दिखाता है, तो सबसे पहले संबंधित थाने या एजेंसी का आधिकारिक फोन नंबर मांगें और उस नंबर को अलग से खोजकर स्वयं सत्यापित करें.


*अपना आधार, पैन, बैंक विवरण, या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें.

*धोखेबाजों की बातों में न आएं, उनसे बहस न करें, और तुरंत फोन काट दें.

*किसी भी संदेह की स्थिति में, साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जानकारी सत्यापित करें.

*डरने के बजाय, इस तरह के कॉल के बारे में तुरंत अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं.


केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध सहयोग केंद्र ने डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल होने वाले 1700 से अधिक स्काइप आईडी और 59,000 व्हाट्सएप अकाउंट को अब तक बंद कर दिया है. सरकार जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार भी कर रही है. (symbolic photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP