सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने पर वसूले 8000 Cr रुपये
नई दिल्ली । डेस्क: सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान खातों में न्यूनतम शेष राशि (मिनिमम बैलेंस) न बनाए रखने के एवज में ग्राहकों से 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुल्क वसूला है. संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वसूली में पंजाब नेशनल बैंक सबसे आगे रहा है, जिसने अकेले 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की, जो कुल वसूली का लगभग 20% है. PNB के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (16%) और इंडियन बैंक (14%) का नंबर आता है.
न्यूनतम बैलेंस के अलावा, सरकारी बैंकों ने SMS सेवाओं के लिए भी ग्राहकों की जेब ढीली की है. आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को छोड़कर अन्य 11 सरकारी बैंकों ने पिछले तीन वर्षों में SMS शुल्क के रूप में करीब 3,388 करोड़ रुपये वसूले हैं.
गौरतलब है कि SBI ने साल 2020 से ही SMS शुल्क माफ कर दिया है. SMS शुल्क वसूलने के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सबसे ऊपर रहा, जिसने कुल वसूली का 35% यानी 1,100 करोड़ रुपये से अधिक वसूले. इसके बाद केनरा बैंक (15%) और पंजाब नेशनल बैंक (10%) का स्थान रहा.
संसद में दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि बैंकों द्वारा ये शुल्क आरबीआई (RBI) के दिशानिर्देशों और बैंकों के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के तहत लिए जाते हैं. नियमों के अनुसार, ये शुल्क तर्कसंगत और पारदर्शी होने चाहिए.
हालांकि, सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि बैंकों द्वारा 'बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट' (BSBDA) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) जैसे जीरो-बैलेंस खाते भी ऑफर किए जाते हैं, जिनमें मिनिमम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं होती और बुनियादी बैंकिंग सेवाएं मुफ्त मिलती हैं.