Forced Labor: अन्य देशों के मामलों में US की दखलअंदाज़ी
वांग ज़िगेन, बीजिंग
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत कई देशों और क्षेत्रों से होने वाले आयात पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने का ऐलान किया है. इस अनुचित कदम के पीछे तथाकथित 'जबरन श्रम' (Forced Labor) के आरोपों को बहाना बनाया गया है. वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका का तथ्य-आधारित कदम नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के नाम पर अन्य देशों की संप्रभुता, औद्योगिक नीतियों और आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने का एक नया पैंतरा है.
बिना सबूत पूर्वाग्रह और एकतरफा शर्तें
अमेरिका की यह कार्रवाई निष्पक्ष जांच के बजाय 'पूर्वाग्रह से ग्रसित' नजर आती है. बिना किसी ठोस कानूनी उल्लंघन के, विदेशी कंपनियों और उनकी पूरी सप्लाई चेन को 'उच्च जोखिम' की श्रेणी में डाल दिया जाता है. इसके बाद कंपनियों को अपने कच्चे माल, घटकों और बहु-स्तरीय आपूर्तिकर्ताओं का असीमित रिकॉर्ड देने पर मजबूर किया जाता है. इतना ही नहीं, ढेरों सबूत और दस्तावेज जमा करने के बाद भी यदि कोई एक शर्त अमेरिका के मनमाने मानकों के अनुकूल नहीं होती, तो पूरे मामले को खारिज कर दिया जाता है. यह तथ्य तलाशने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जबरन दोष मढ़ने की सोची-समझी रणनीति है.
दोहरे मापदंड और संप्रभु अधिकारों पर हमला
श्रम नीतियां किसी भी देश का आंतरिक और संप्रभु मामला होती हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन अपने एकतरफा मानकों को पूरी दुनिया पर थोप रहा है. समीक्षा प्रक्रिया में अमेरिका का दोहरा रवैया साफ दिखता है-जहाँ अस्पष्ट और संदिग्ध स्रोतों वाले आरोपों को तुरंत स्वीकार कर लिया जाता है, वहीं कंपनियों द्वारा पेश किए गए ठोस व सार्वजनिक साक्ष्यों (जैसे कर्मचारियों की स्वेच्छा, वेतन रिकॉर्ड और बढ़ता जीवन स्तर) को सिरे से खारिज कर दिया जाता है. इस तरह निष्पक्ष जांच के नाम पर केवल अमेरिका के पूर्व-निर्धारित राजनीतिक आख्यान को ही सही ठहराने की कोशिश की जा रही है.
विकासशील देशों के विकास अधिकार पर प्रहार
मानवाधिकार समीक्षा के नाम पर अमेरिका दरअसल अपने बाजार-पहुंच संबंधी नियमों का दुरुपयोग कर रहा है, ताकि अन्य देशों की प्रतिस्पर्धी कंपनियों को दबाया जा सके और उनके औद्योगिक विकास में रुकावट डाली जा सके. उच्च शुल्क लगाकर और कंपनियों को अपने बाजार से बाहर करके अमेरिका उन्हीं श्रमिकों के रोजगार को नुकसान पहुँचा रहा है, जिनके संरक्षण का वह दावा करता है. मानवाधिकारों का इस्तेमाल किसी देश के विकास के अधिकार को छीनने या उसके आंतरिक मामलों में दखल देने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.