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दवाओं पर जीएसटी समाप्त करो- FMRAI

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14 जून 2025, 03:20 AM 3 मिनट में पढ़ें 6

GST on Medicine
GST on Medicine

नई दिल्ली । संवाददाता: भारत में दवा प्रतिनिधियों की शीर्ष संस्था फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) ने केंद्र सरकार से दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों पर लगने वाले वस्तु एवं सेवा कर (GST) को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है.


एफएमआरएआई ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपे गये एक ज्ञापन में कहा है कि विभिन्न स्लैब में लगने वाला जीएसटी आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है.     

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ज्ञापन में कहा गया, "अत्यावश्यक दवाओं पर लगाये गये जीएसटी के विभिन्न स्लैब ने रोगियों और उनके परिवारों पर भारी वित्तीय दबाव डाला है. यह वित्तीय संकट नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार को कमजोर करता है."


वर्तमान में दवाओं पर जीएसटी की दरें 0%, 5%, 12% और 18% तक हैं. हालांकि सरकार समय-समय पर कुछ जीवनरक्षक दवाओं और टीकों पर कर में कटौती करती रही है, लेकिन अधिकांश दवायें अभी भी ऊंचे करदरों के दायरे में आती हैं.


एफएमआरएआई का कहना है कि "स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक के लिए सुलभ और किफायती होनी चाहिये, विशेष रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये."


संघ ने देशभर के 20 राज्य स्तरीय और 400 जिला स्तरीय इकाइयों के माध्यम से देश के अलग-अलग जीएसटी कार्यालयों में ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.


मुंबई में फरवरी 2025 में हुई 27वीं कॉन्फ्रेंस में यह सामने आया कि मौजूदा शासन के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. संघ ने यह भी कहा कि लोग इलाज के कैटास्ट्रोफिक आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंसेस (OOPE) के चलते गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं.


एफएमआरएआई की मासिक पत्रिका के अनुसार, वर्तमान बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये 2 प्रतिशत से भी कम राशि आवंटित की गई है, जबकि WHO की सिफारिश 6 प्रतिशत की है. ग्रामीण क्षेत्र के केवल 14% और शहरी क्षेत्र के केवल 19% लोग ही किसी स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत आते हैं.


संघ ने केंद्र सरकार से 6 मुख्य मांगें रखी हैं-


सभी दवाओं की कीमतों में कटौती की जाये और इन्हें मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जाये.


दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों से सभी जीएसटी स्लैब हटाए जायें.


सभी दवाओं पर आयात शुल्क समाप्त किया जाये.


सभी दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाये.


नकली दवाएं बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये.


स्वास्थ्य बजट को देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 5 प्रतिशत किया जाये.


एफएमआरएआई ने यह भी मांग की है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई जाये ताकि दवा वितरण की गुणवत्ता और निगरानी बनी रहे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP