इसराइली हमले में अल जज़ीरा के पांच पत्रकारों की मौत
दिल्ली | डेस्कः ग़ज़ा के अल-शिफ़ा अस्पताल के नज़दीक हुए इसराइली हमले में पांच पत्रकारों की मौत हो गई है. ये पांचों पत्रकार अल जज़ीरा मीडिया समूह के लिए काम कर रहे थे.
अल जज़ीरा के मुताबिक़, इसराइली हमले के वक्त संवाददाता अनस अल-शरीफ़ और मोहम्मद कुरैके, कैमरापर्सन इब्राहिम ज़हीर, मोहम्मद नौफ़ाल और मोएमेन अलीवा अस्पताल के मेन गेट पर पत्रकारों के लिए बने एक टेंट में थे.
इस हमले में कुल 7 लोग मारे गए हैं. हमले के तुरंत बाद इजराइली सेना ने माना कि उन्होंने रिपोर्टर अनस अल शरीफ को निशाना बनाया था.
क़रीब दो हफ़्ते पहले अल जज़ीरा ने इसराइली रक्षा बलों (आईडीएफ़) की निंदा की थी और कहा था कि ग़ज़ा में अल-शरीफ़ सहित उसके पत्रकारों के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा अभियान 'उकसावे का अभियान' है.
इजराइली सेना ने अनस को आतंकवादी बताया और दावा किया कि वह हमास में एक आतंकी सेल के चीफ के तौर पर काम कर चुका था. उसका काम इजराइली नागरिकों और सैनिकों पर रॉकेट हमले कराना था.
28 साल के अनस ने मौत से कुछ देर पहले ही एक्स पर इजराइली सेना की बमबारी का वीडियो शेयर किया था. अनस अल शरीफ ग़ज़ा से रिपोर्टिंग करने वाले सबसे मशहूर चेहरों में से थे.
उन्होंने आखिरी पोस्ट में लिखा था कि लगातार बमबारी हो रही है, दो घंटे से ग़ज़ा शहर पर इजराइली हमला तेज हो गया है.
अब तक 200 पत्रकारों की मौत
ग़ज़ा में 22 महीने से चल रही जंग के बीच अब तक करीब 200 मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं. अनस की मौत के बाद ग़ज़ा में पत्रकार सुरक्षा समिति (CPJ) ने इस पर नाराजगी जताई. CPJ ने बयान जारी कर कहा कि वह पत्रकारों की मौत से हैरान है.
CPJ की डायरेक्टर सारा कुदाह ने कहा कि बिना सबूत पत्रकारों को आतंकवादी कहना इसराइल की मंशा और प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
उन्होंने कहा कि पत्रकार नागरिक होते हैं और उन्हें कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और इसके जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. फ़लस्तीनी पत्रकार संघ ने भी इस हमले को खूनी अपराध बताते हुए, इसकी निंदा की है.
इसराइल और अल जज़ीरा के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं. इसराइली अधिकारियों ने देश में अल जज़ीरा पर प्रतिबंध लगा रखा है और ग़ज़ा में युद्ध के बाद इसके दफ्तरों पर छापेमारी भी की थी.
जंग खत्म करने के लिए गाजा पर कब्जा जरूरी- नेतन्याहू
इस बीच इसराइली पीएम नेतन्याहू ने ग़ज़ा पर कब्जे की योजना का बचाव किया है. उन्होंने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ग़ज़ा के सबसे बड़े शहर ग़ज़ा सिटी पर कब्जा करना जंग को खत्म करने का सबसे सही और आसान तरीका है.
इसराइली सिक्योरिटी कैबिनेट ने शुक्रवार सुबह ग़ज़ा सिटी पर कब्जा करने की मंजूरी दी थी. नेतन्याहू ने कहा कि यह कदम हमास को खत्म करने और बंधकों को छुड़ाने के लिए ज़रूरी है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ ही इसराइल के ही हजारों लोगों का मानना है कि इससे बंदियों की जान और खतरे में पड़ सकती है और गाजा में संकट और बड़ा हो जाएगा.
नेतन्याहू की योजना को लेकर इसराइल में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है.
फ़लस्तीन को एक राष्ट्र के तौर पर मान्यता देगा ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा है कि सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनका देश फ़लस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता देगा.
इससे पहले ब्रिटेन, फ़्रांस और कनाडा ने फ़लस्तीन को स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने की बात कही है.वहीं, ग़ज़ा में युद्ध विराम के लिए बढ़ते दबाव का सामना कर रहे इसराइल ने कहा है कि फ़लस्तीन को मान्यता देना "आतंकवाद को इनाम" देने जैसा है.
शनिवार से अब तक ग़ज़ा में भूख और कुपोषण के कारण पांच लोगों की मौत हो चुकी है. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ कुल मृतकों की संख्या 217 हो गई है.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि 2023 से अब तक इसराइल के सैन्य अभियान में कुल मिलाकर 61 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.