किसान संगठनों ने मांगा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का इस्तीफा
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा अमेरिका से शून्य टैरिफ पर कच्चे कपास के आयात की सुविधा को लेकर दिए गए बयान ने देश के सियासी और कृषि गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने इसे भारतीय किसानों के हितों के साथ "समर्पण" करार देते हुए सरकार की तीखी आलोचना की है.
दरअसल, श्री गोयल ने विपक्ष के इन दावों को खारिज किया था कि बांग्लादेश को अमेरिका से व्यापार में अधिक लाभ मिल रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास भी वही सुविधा उपलब्ध है, जिसके तहत अमेरिका से कच्चा माल खरीदकर, उसे कपड़े में प्रोसेस कर निर्यात करने पर शून्य पारस्परिक शुल्क लगेगा.
हालांकि, इस स्पष्टीकरण ने किसानों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) जैसे संगठनों ने इसे भारतीय संप्रभुता का अमेरिकी हितों के सामने आत्मसमर्पण बताया है.
किसान नेताओं का तर्क है कि अमेरिका से भारी सब्सिडी वाले और मशीनरी-आधारित कपास का आयात घरेलू बाजार में कीमतों को गिरा देगा, जिससे पहले से ही संकट झेल रहे भारतीय कपास उत्पादक बर्बाद हो जाएंगे.
पंजाब के फाजिल्का, जिसे कभी 'पंजाब का मैनचेस्टर' कहा जाता था, वहां के किसान नेताओं ने सवाल उठाया है कि अगर सरकार अमेरिका से कपास मंगवाने की योजना बना रही है, तो पंजाब और अन्य राज्यों के कपास किसानों का भविष्य क्या होगा? गुजरात के किसान नेताओं ने भी इसे बड़ी टेक्सटाइल कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया है.
आंकड़ों के जरिए विरोध को धार देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि जनवरी-नवंबर 2024 की तुलना में 2025 की इसी अवधि में अमेरिका से कपास का आयात 95.5% बढ़कर 377.90 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.
संगठनों का कहना है कि स्वामीनाथन फॉर्मूले के अनुसार कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 10,075 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था, जबकि इसे मात्र 7,710 रुपये तय किया गया है. ऐसे में सस्ते आयात से किसानों की आय और कम होगी, जिससे कर्ज और आत्महत्याओं का संकट गहरा सकता है.
ऑल इंडिया किसान सभा ने आगाह किया है कि भारत का कपास उत्पादन अमेरिका से लगभग दोगुना है, लेकिन यदि भारतीय किसानों को बिना किसी संरक्षण के वैश्विक प्रतिस्पर्धा में झोंक दिया गया, तो वे तकनीक और सब्सिडी के मामले में समृद्ध अमेरिकी उत्पादकों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे. किसान संगठनों ने अब वाणिज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है.