चुनाव आयोग का पलटवार: 'कांग्रेस ने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई'
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हरियाणा विधानसभा चुनावों में कथित 'वोट चोरी' को लेकर जो 'एच-फाइल्स' प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उस पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस ने चुनावी सूचियों के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की, और उच्च न्यायालय में केवल 22 चुनाव याचिकाएं ही लंबित हैं.
समाचार पत्र के सूत्रों के हवाले से, चुनाव आयोग ने पूछा है कि जब मतदाता सूचियां सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की गईं, तो कांग्रेस के मतदान एजेंटों ने मतदान केंद्रों पर नकली या दोहरे मतदाताओं की पहचान क्यों नहीं की. आयोग ने यह भी जानना चाहा कि क्या गांधी SIR अभ्यास का समर्थन करते हैं, जिसका उद्देश्य नकली और जाली मतदाताओं को हटाकर चुनावी सूचियों को दुरुस्त करना है.
इस बीच, हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि वह गांधी के दावों पर एक विस्तृत जवाब जारी करेंगे. उन्होंने बताया कि राज्य की मसौदा मतदाता सूची पिछले साल 2 अगस्त को सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थी, और अंतिम मतदाता सूची 27 अगस्त को प्रकाशित कर साझा की गई थी.
राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अकेले हरियाणा में लगभग 25 लाख वोट चोरी हुए हैं, और उन्होंने इसे 'वोट हेरफेर का ब्राजील मॉडल' करार दिया. उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल में कांग्रेस जीत रही थी, लेकिन अंतिम नतीजे कुछ और कहानी बताते हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डाक मतपत्रों में कांग्रेस आगे थी, लेकिन आधिकारिक परिणाम इसे नहीं दर्शाते.
गांधी ने मतदाता सूचियों से जुड़ी कई विसंगतियाँ सामने रखीं, जैसे- एक ही महिला की तस्वीर का कथित तौर पर 22 अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड पर दिखना, एक ही पते पर 500 मतदाताओं का पंजीकृत होना.
उनके अनुसार, हरियाणा में हर आठ में से एक वोटर आईडी कार्ड नकली है, जिसमें 1.24 लाख से अधिक मतदाताओं के पास जाली तस्वीरें हैं.
उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि ईसीआई ने डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करने वाले अपने सॉफ़्टवेयर को चलाने से इनकार कर दिया.
गांधी ने दावा किया कि आयोग ने नकली मतदाताओं को नज़रअंदाज़ किया, जिसके कारण भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर विभिन्न राज्यों में कई बार मतदान किया.