दावोस में डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ‘ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा है’
दावोस । डेस्क: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में वैश्विक नेताओं को संबोधित किया. ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय बने ग्रीनलैंड मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट रूप से घोषणा की कि ग्रीनलैंड वास्तव में उत्तर अमेरिका का हिस्सा है और यह अमेरिका का ही भूभाग है.
उन्होंने डेनमार्क की आलोचना करते हुए कहा कि वह इस द्वीप की रक्षा करने में अक्षम है और रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका का इस पर नियंत्रण होना अनिवार्य है. ट्रंप ने इसके अधिग्रहण के लिए तत्काल बातचीत शुरू करने का आह्वान भी किया.
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने सभा में मौजूद 'दोस्तों और कुछ दुश्मनों' का जिक्र कर माहौल को हल्का किया, जिसके बाद उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों का बखान किया.
ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने ऐसी वृद्धि हासिल की है जो पहले कभी नहीं देखी गई. उन्होंने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और सीमाओं को सुरक्षित करने का दावा करते हुए कहा कि जब अमेरिका समृद्ध होता है, तो पूरी दुनिया उसका अनुसरण करती है.
यूरोपीय देशों और विशेषकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों द्वारा ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनके विरोध किए जाने पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यूरोप के कुछ हिस्से अब पहचाने नहीं जा रहे हैं और वे सही दिशा में नहीं बढ़ रहे हैं.
इसके साथ ही उन्होंने ब्रिटेन की 'ग्रीन एनर्जी' रणनीति को एक 'धोखा' करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की. ट्रंप ने चीन पर तंज कसते हुए कहा कि वे पवन चक्कियां खुद इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि केवल 'मूर्ख लोगों' को बेचने के लिए बनाते हैं.
ऊर्जा के मुद्दे पर ट्रंप ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव संकेत देते हुए परमाणु ऊर्जा का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि पहले वे सुरक्षा कारणों से इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन अब तकनीकी प्रगति ने इसे सुरक्षित और किफायती बना दिया है, इसलिए अमेरिका अब बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है.
अंत में, उन्होंने नाटो पर अमेरिका के साथ बुरा व्यवहार करने का आरोप लगाया और दावा किया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण से वास्तव में नाटो गठबंधन की सुरक्षा और मजबूत होगी.