विजय को रोकने की DMK-AIADMK की कोशिशें विफल, TVK की राह हुई आसान
चेन्नई । डेस्क: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक ऐसा अभूतपूर्व और नाटकीय मोड़ आया है, जिसने दशकों पुराने द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को हिला कर रख दिया है. अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद, राज्य की दो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पार्टियों DMK और AIADMK ने उन्हें सत्ता से दूर रखने के लिए पर्दे के पीछे से हाथ मिलाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उनकी यह कवायद पूरी तरह विफल साबित हुई है.
चुनावी नतीजों में बहुमत के 118 के आंकड़े से महज 10 सीट दूर खड़ी TVK को रोकने के लिए पिछले कई दिनों से गहन बैकचैनल बातचीत, दलबदल की कोशिशों और गठबंधन के नए फॉर्मूलों पर चर्चा चल रही थी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIADMK के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि और सी.वी. शनमुगम ने पार्टी प्रमुख ई. पलानीस्वामी की जानकारी के बिना TVK को समर्थन देने और सरकार में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए पासा फेंका था, ताकि 33 विधायकों के साथ दलबदल विरोधी कानून से बचा जा सके.
वहीं दूसरी ओर, खुद पलानीस्वामी ने DMK के उदयनिधि स्टालिन के साथ मिलकर एक ऐसी सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा था जिसे DMK बाहर से समर्थन दे, ताकि विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखा जा सके.
इस राजनीतिक उठापटक के बीच राज्य में एक बार फिर 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' का दौर लौट आया, जहाँ AIADMK ने अपने विधायकों में संभावित टूट को रोकने के लिए उन्हें पुडुचेरी के विभिन्न रिजॉर्ट्स में भेज दिया और उनके बाहरी संपर्क काट दिए. हालांकि, DMK और AIADMK की यह साझा घेराबंदी तब ध्वस्त हो गई जब वामपंथी दलों (CPI और CPM) ने DMK के प्रस्ताव को ठुकराते हुए स्पष्ट रूप से विजय की TVK को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी.
कांग्रेस के विधायकों ने भी विजय के कार्यालय में समर्थन पत्र सौंपकर स्थिति को और स्पष्ट कर दिया.
एम.के. स्टालिन द्वारा गठबंधन सहयोगियों को एकजुट रखने की कोशिशों के बावजूद, वामपंथी दलों के इस रुख ने द्रविड़ राजनीति के दोनों दिग्गजों की रणनीतियों पर पानी फेर दिया है.
वर्तमान में स्थिति यह है कि छोटी पार्टियों और निर्दलीयों के साथ-साथ वामपंथी समर्थन मिलने से विजय की सरकार बनने की राह लगभग साफ नजर आ रही है, जबकि DMK और AIADMK के बीच की यह गुप्त खींचतान अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है. फिलहाल राज्य की नजरें 9 मई को होने वाले अगले बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं, जब गठबंधन की अंतिम तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होने की उम्मीद है.