घुसपैठियों पर "detect, delete and deport" की नीति: अमित शाह
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए 'भगवाकरण' के आरोप का कड़ा जवाब दिया है. शुक्रवार को एक व्याख्यान देते हुए शाह ने कहा कि किसी को भी SIR प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह चुनाव आयोग (EC) का संवैधानिक दायित्व है.
शाह ने इस बात पर जोर दिया कि घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल करना संविधान की भावना को दूषित करता है, और मतदान का अधिकार केवल देश के नागरिकों को ही मिलना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार घुसपैठियों से निपटने के लिए "पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो" ('detect, delete and deport') की नीति का पालन करेगी.
गृह मंत्री ने कहा कि घुसपैठ और मतदाता सूची की SIR को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रीय मुद्दा समझना चाहिए. उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस अभ्यास का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इससे उनका वोट बैंक प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा, "विपक्ष इसका विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि उनके वोट बैंक कट रहे हैं. मतदाता सूची को साफ करना ईसी का संवैधानिक दायित्व है. अगर आपको कोई समस्या है, तो आप कोर्ट जा सकते हैं."
शाह ने घुसपैठिए और शरणार्थी के बीच अंतर भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि शरणार्थी अपने धर्म को बचाने के लिए भारत आते हैं, जबकि घुसपैठिए धार्मिक उत्पीड़न के कारण नहीं, बल्कि आर्थिक या अन्य कारणों से अवैध रूप से सीमा पार करते हैं. उन्होंने चेतावनी दी, "अगर दुनिया में किसी को भी यहाँ आने की अनुमति दी जाए, तो हमारा देश धर्मशाला बन जाएगा."
इससे पहले ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर चुनावी सूची, संस्थानों और यहाँ तक कि त्योहारों के 'पूर्ण भगवाकरण' का आरोप लगाया था. उन्होंने बुधवार को अमित शाह को 'मीर जाफर' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को उनसे सावधान रहने की चेतावनी भी दी थी.