हिंदू राष्ट्र की मांग: नेपाल सरकार ने प्रसाई को बातचीत के लिए बुलाया
काठमांडू । डेस्क: नेपाल सरकार ने हिंदू राष्ट्र की बहाली और राजतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए एक बड़े आंदोलन का आह्वान करने वाले विवादास्पद व्यवसायी दुर्गा प्रसाई को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. यह कदम प्रसाई द्वारा छठ पर्व के बाद सोमवार से सड़कों पर उतरने और प्रमुख राजमार्गों को अवरुद्ध करने के आह्वान के तुरंत बाद उठाया गया है, जिसे उन्होंने "हिंदू राज्य की बहाली" के लिए एक नया आंदोलन बताया है.
दुर्गा प्रसाई, जो एक समय माओवादी से जुड़े थे और अब एक मुखर राजतंत्र-समर्थक बन गए हैं, अपने 'राष्ट्र, राष्ट्रीयता, धर्म-संस्कृति और नागरिक बचाओ आंदोलन' के माध्यम से मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगों पर ज़ोर दे रहे हैं:
नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करना: 2008 में नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किए जाने से पहले यह दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था. प्रसाई और उनके समर्थक संविधान में संशोधन कर देश को फिर से हिंदू राज्य का दर्जा दिलाना चाहते हैं.
संवैधानिक राजतंत्र की पुनर्स्थापना: प्रदर्शनकारी वर्तमान संघीय लोकतांत्रिक प्रणाली को समाप्त कर पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को संवैधानिक प्रमुख के रूप में वापस लाने की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि वर्तमान राजनीतिक दल भ्रष्ट हैं और देश को अस्थिर कर रहे हैं, जबकि राजा देश की रक्षा कर सकते हैं.
इन मांगों के अतिरिक्त, प्रसाई ने प्रधान मंत्री सुशीला कार्की, गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल, काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह, और जेन ज़ी नेता सुदन गुरुंग सहित कई प्रमुख हस्तियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से भड़काऊ बयान दिए हैं.
सरकार की दो-आयामी रणनीति
प्रधानमंत्री कार्की की अध्यक्षता में शनिवार को हुई एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक में देश की सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई. इस बैठक में संभावित संकट से निपटने के लिए एक दो-आयामी रणनीति अपनाने का फैसला किया गया:
वार्ता और संवाद पहल: गृह मंत्री आर्यल ने पुष्टि की कि सरकार ने प्रसाई को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है और काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी (CDO) को उनसे संवाद शुरू करने का निर्देश दिया गया है. मंत्री आर्यल ने कहा, "हमने संवाद का द्वार खुला रखा है. हम बातचीत के माध्यम से समाधान निकालेंगे."
सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था: प्रसाई के पिछले आंदोलन (मार्च में) के दौरान हुई हिंसा, जिसमें कम से कम दो लोग मारे गए थे, और सितंबर में हुई अराजकता, जिसमें कैदी भाग गए और हथियार लूटे गए थे, को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया जानकारी जुटाने को बढ़ाने का फैसला किया है.
सुरक्षा अधिकारियों को आशंका है कि प्रसाई के प्रदर्शनों में दक्षिणपंथी समूह, राजतंत्र समर्थक, हिंदू समर्थक संगठन, और हालिया जेन ज़ी विद्रोह के विरोधी समूह शामिल हो सकते हैं, जिससे हिंसा और अस्थिरता बढ़ने का खतरा है.
चुनावी माहौल बनाए रखने की अपील
गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर सभी पक्षों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें और आगामी चुनावों (जो अगले साल 5 मार्च को होने हैं) की प्रक्रिया को बाधित न करें. मंत्रालय ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों को रखते समय लोगों के शांति से रहने, निर्बाध सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँचने और चुनावों में भाग लेने के अधिकारों का उल्लंघन न करने का आग्रह किया है. मंत्री आर्यल ने प्रदर्शनकारियों से अहिंसक रहने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का आह्वान किया.
इस बीच, काठमांडू पुलिस ने शनिवार को 'जेन ज़ी यूनाइटेड' नामक समूह के 50 सदस्यों को बिना अनुमति के प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया. (File Photo)