दिल्ली HC का CJP का एक्स अकाउंट तुरंत बहाल करने से इनकार
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के ब्लॉक किए गए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' अकाउंट को तुरंत बहाल करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत गठित वैधानिक समीक्षा समिति (Review Committee) सरकार की इस ब्लॉकिंग कार्रवाई के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों और चुनौतियों की जांच करे.
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा केंद्र सरकार के इस निलंबन के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. अदालत ने इस चरण पर अंतरिम राहत देने से साफ मना कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार को इस मामले में अपना रुख रिकॉर्ड पर रखने को कहा है.
इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और 'एक्स' को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत से अकाउंट को अंतरिम रूप से बहाल करने और ब्लॉकिंग ऑर्डर को सार्वजनिक करने की मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया कि पूर्व के मामलों में अदालतों ने केवल आपत्तिजनक पोस्ट को ब्लॉक करने की अनुमति दी थी, न कि पूरे अकाउंट को.
हालांकि, अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऑनलाइन अकाउंट्स को ब्लॉक करने से जुड़ा कानूनी ढांचा अभी विकसित हो रहा है और इस मामले में अधिकारियों की चिंताएं केवल कुछ चुनिंदा पोस्ट से नहीं, बल्कि पूरे अकाउंट की गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं.
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अकाउंट को तुरंत बहाल करने की मांग का कड़ा विरोध किया. अदालत ने आईटी (प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के तहत उपलब्ध वैधानिक समीक्षा तंत्र का संज्ञान लिया और समीक्षा समिति को याचिकाकर्ता की शिकायतों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने का निर्देश दिया.
इसके अलावा, याचिकाकर्ता अभिजीत दिपके के देश से बाहर होने के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा समिति की कार्यवाही में शामिल होने के अनुरोध पर अदालत ने कहा कि यह मांग समिति के समक्ष रखी जा सकती है, जो कानून के अनुसार इस पर विचार करेगी.