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TMC दफ्तर और अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर CID का छापा

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09 जून 2026, 06:45 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार को उस समय भारी सरगर्मी बढ़ गई जब राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की एक बड़ी टीम भारी पुलिस बल और केंद्रीय बलों के साथ कालीघाट स्थित तृणमूल कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय पहुंच गई. यह कार्यालय राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के आवास के ठीक बगल में स्थित है. 


'फर्जी हस्ताक्षर' (साइ-कांड) मामले की जांच के सिलसिले में हुई इस कार्रवाई के दौरान सीआईडी और टीएमसी नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली. इसके साथ ही सीआईडी की एक अन्य टीम ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट स्थित कार्यालय पर भी दस्तक दी, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है.

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जांच एजेंसी की यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं. मंगलवार दोपहर जब सीआईडी की टीम 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय पहुंची, तो उन्हें शुरुआत में अंदर जाने से रोक दिया गया. 


टीएमसी के पूर्व सांसद और पार्टी कोषाध्यक्ष सुभाशीष चक्रवर्ती ने गेट पर आकर सीआईडी अधिकारियों का रास्ता रोका और उनसे बहस करने लगे. चक्रवर्ती का तर्क था कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी कोलकाता में मौजूद नहीं हैं, इसलिए वह उनकी अनुपस्थिति में किसी को भी कार्यालय के भीतर जाने की अनुमति नहीं दे सकते. उन्होंने जांचकर्ताओं से दो-तीन दिन का समय भी मांगा.


हालांकि, सीआईडी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे अदालत और कानून के दायरे में रहकर तलाशी अभियान चलाने आए हैं और जांच का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि वहां कौन मौजूद है. अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी को भेजा गया समन और नोटिस भी दिखाया. लगभग एक घंटे तक चले इस गतिरोध और भारी खींचतान के बाद, शाम करीब 4 बजे सीआईडी की टीम को दफ्तर के भीतर प्रवेश मिला. 


केंद्रीय बलों की सुरक्षा में जांच एजेंसी ने लगभग दो घंटे तक टीएमसी कार्यालय के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली. इस मामले में अभिषेक बनर्जी को मंगलवार शाम 5 बजे तक भवानी भवन (सीआईडी मुख्यालय) में हाजिर होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए. इससे पहले भी वह सीआईडी के कई समन टाल चुके हैं और उन्होंने 14 दिन का समय मांगा था, जिसे एजेंसी ने खारिज कर दिया था.


यह पूरा मामला विधानसभा अध्यक्ष रथीन बसु को टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों के साथ भेजे गए एक प्रस्तावित पत्र से जुड़ा है. आरोप है कि इस पत्र में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर 'फर्जी' या जाली थे. सूत्रों के मुताबिक, जिस बैठक में ये हस्ताक्षर जुटाए गए थे, वह कालीघाट के इसी कार्यालय में हुई थी. 


सीआईडी की टीम इसी सिलसिले में सबूत जुटाने और वहां के सीसीटीवी फुटेज हासिल करने पहुंची थी. हालांकि, दो घंटे की तलाशी के बाद जब टीम बाहर निकली, तो सुभाशीष चक्रवर्ती ने दावा किया कि सीआईडी को अंदर कुछ नहीं मिला और उन्होंने कोई भी सामान जब्त नहीं किया है.


इस छापेमारी की खबर मिलते ही टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कुणाल घोष तथा कल्याण बनर्जी भी मौके पर पहुंच गए. नेताओं ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और ममता बनर्जी की छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया. 


कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के दौरान उनके आवास के पास इस तरह की छापेमारी करना बेहद आपत्तिजनक है. उन्होंने यह भी दावा किया कि सीआईडी अपने साथ गवाह के तौर पर भाजपा के दो कार्यकर्ताओं को लेकर आई थी. 


टीएमसी नेताओं का कहना है कि पार्टी ने हमेशा जांच में सहयोग किया है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई केवल राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की जा रही है, जिसका जवाब पश्चिम बंगाल की जनता आने वाले समय में देगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP