अस्पताल से वापस जेल भेजी गई क्रिस्ता पाइक, US में कैपिटल पनिशमेंट पर बहस तेज
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका में प्राणघातक इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) के जरिए दी जाने वाली मौत की सजा से जीवित बची 50 वर्षीया क्रिस्ता पाइक को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वापस टेनेसी की महिला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है. पाइक के वकीलों ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से डेबोरा के. जॉनसन पुनर्वास केंद्र में बंद हैं. बीते 30 सितंबर को अधिकारियों द्वारा पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दिए जाने के बाद बिगड़ी तबीयत के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
1995 के हत्याकांड में मिली थी सजा-ए-मौत
क्रिस्ता पाइक को वर्ष 1995 में अपनी सहपाठी कॉलीन स्लेमर की बेरहमी से पिटाई और चाकू मारकर हत्या करने का दोषी ठहराया गया था. 1996 में अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी. पाइक के वकीलों के अनुसार, अब जेल परिसर के भीतर ही उनका इलाज जारी है और उनकी मेडिकल टीम उनकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए है. वकीलों ने आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम और डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया है.
नाकाम निष्पादन के बाद भी विकल्पों पर विचार जारी
टेनेसी में इस नाकाम निष्पादन के बावजूद वहां के रिपब्लिकन विधायकों ने मृत्युदंड पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके विपरीत, वहां मृत्युदंड के लिए वैकल्पिक तरीकों जैसे इलेक्ट्रिक चेयर (बिजली की कुर्सी) और फायरिंग स्क्वाड (गोली मारने वाले दस्ते) के इस्तेमाल पर चर्चा शुरू हो गई है.
निडाल हसन के निष्पादन के लाइव प्रसारण पर विवाद
पाइक के मामले से इतर, अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व सैन्य मनोचिकित्सक निडाल मलिक हसन के 3 दिसंबर को तय निष्पादन को लाइवस्ट्रीम करने की पेंटागन की योजना का व्यापक विरोध हो रहा है. हसन को 2009 में फोर्ट हुड में 13 लोगों की हत्या का दोषी पाया गया था.
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा निष्पादन के सीधे प्रसारण की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रसारण पर संदेह जताते हुए इसे देखने से इनकार किया है, जबकि रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने इसे बेहद शर्मनाक करार दिया है. वहीं, कैथोलिक बिशप सम्मेलन ने इस प्रस्ताव को एक बर्बर कदम बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है.
अमेरिका में घट रहा है मृत्युदंड का जनसमर्थन
अमेरिका में 1990 के दशक की तुलना में अब मृत्युदंड के प्रति जनता का समर्थन कम हुआ है. 1996 के बाद से अब तक करीब दस राज्य पूंजीगत दंड को समाप्त कर चुके हैं, हालांकि कई राज्यों में यह व्यवस्था अब भी लागू है. इस वर्ष अमेरिका में अब तक 30 लोगों को मृत्युदंड दिया जा चुका है, जबकि टेक्सास और फ्लोरिडा सहित अन्य राज्यों में आठ और निष्पादन प्रस्तावित हैं.
हालिया प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण के मुताबिक, अमेरिका के करीब दो-तिहाई वयस्क गंभीर अपराधों के लिए मृत्युदंड को नैतिक रूप से सही मानते हैं. हालांकि, इनमें से लगभग 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इससे अपराधों पर अंकुश नहीं लगता, और करीब 70 प्रतिशत वयस्कों को डर है कि इस प्रक्रिया में किसी निर्दोष को सजा मिलने का जोखिम हमेशा बना रहता है.