चीन ने 'संरक्षणवाद' पर अमेरिका को जमकर लताड़ा
बीजिंग । डेस्क: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के एक विवाद निपटान पैनल ने अमेरिका के 'इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट' (IRA) के खिलाफ चीन द्वारा दायर मामले में बीजिंग के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. WTO पैनल ने शुक्रवार को अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिका की स्वच्छ ऊर्जा सब्सिडी योजनाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं हैं. पैनल ने अमेरिकी प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह इन विवादास्पद सब्सिडी उपायों को तुरंत वापस ले.
इस फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है और चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों की जीत बताया है.
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे याडोंग ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि WTO का यह निर्णय पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष है, जो संगठन के सदस्य देशों के बीच मौजूद बुनियादी सहमति को प्रतिबिंबित करता है.
प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने उरुग्वे दौर की वार्ताओं में इन नियमों पर हस्ताक्षर किए थे, इसलिए एक हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते अमेरिका का यह कानूनी और नैतिक दायित्व है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय संधि प्रतिबद्धताओं का पालन करे.
चीन ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय के उस बयान की भी कड़ी निंदा की, जिसमें इस फैसले को 'त्रुटिपूर्ण' बताते हुए दावा किया गया था कि वर्तमान WTO नियम 'ओवरकैपेसिटी' (अति-क्षमता) के मुद्दे को सुलझाने में अक्षम हैं.
हे याडोंग ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका के ये तर्क केवल अपनी गलतियों को छिपाने और सब्सिडी के दुरुपयोग को सही ठहराने की एक कोशिश मात्र हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में कमी और घरेलू समस्याओं का दोष दूसरे देशों पर मढ़ने के लिए संरक्षणवादी नीतियों का सहारा ले रहा है.
प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के ये कदम वैश्विक बाजारों को कृत्रिम रूप से खंडित कर रहे हैं, जिससे वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है.
उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था एकतरफावाद और संरक्षणवाद के कारण गहरे संकट का सामना कर रही है. ऐसी स्थिति में WTO केंद्रित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है.
चीन ने इस बात को दोहराया कि वह अशांत विश्व अर्थव्यवस्था में एक 'स्थिर एंकर' की भूमिका निभाता रहेगा और आपसी लाभ के आधार पर खुले सहयोग को बढ़ावा देगा. चीनी मीडिया के अनुसार, यह फैसला इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय नियमों से ऊपर नहीं है और एकतरफा व्यापारिक प्रथाओं को बहुपक्षीय प्रणाली के तहत परिणामों का सामना करना ही होगा.
चीन ने अब अमेरिका से आग्रह किया है कि वह अपनी गलतियों को सुधारते हुए नियमों पर आधारित व्यापार व्यवस्था को बहाल करने के लिए ठोस कार्रवाई करे.
विश्व व्यापार संगठन (WTO) क्या है?
विश्व व्यापार संगठन (WTO) एकमात्र वैश्विक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के बीच व्यापार के नियमों को नियंत्रित करता है. इसकी स्थापना 1 जनवरी 1995 को मार्राकेश समझौते के तहत हुई थी, जिसने 1948 से चले आ रहे 'शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते' (GATT) का स्थान लिया. स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मुख्यालय वाले इस संगठन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक व्यापार यथासंभव सुचारू, स्वतंत्र और पूर्वानुमानित तरीके से संचालित हो. वर्तमान में इसके 164 सदस्य देश हैं, जो सामूहिक रूप से दुनिया के 98% से अधिक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं.
WTO के कार्यों का दायरा केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं और बौद्धिक संपदा (जैसे पेटेंट और कॉपीराइट) भी शामिल हैं. इसका सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ इसके 'समझौते' हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए कानूनी नियम निर्धारित करते हैं. ये नियम सदस्य देशों की सरकारों को अपनी व्यापार नीतियों को पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण रखने के लिए बाध्य करते हैं.
जब दो या दो से अधिक देशों के बीच व्यापारिक नियमों को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, जैसा कि हाल ही में चीन और अमेरिका के मामले में हुआ, तो WTO एक तटस्थ मंच के रूप में कार्य करता है और अपने 'विवाद निपटान निकाय' (Dispute Settlement Body) के माध्यम से निष्पक्ष फैसला सुनाता है.
यह संगठन विकासशील और सबसे कम विकसित देशों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण भी प्रदान करता है, ताकि वे वैश्विक बाजार में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें. प्रत्येक दो वर्ष में होने वाला 'मंत्रिस्तरीय सम्मेलन' (Ministerial Conference) इसका सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जहाँ सभी सदस्य देश मिलकर नए नियमों पर बातचीत करते हैं.
संक्षेप में, WTO वैश्विक अर्थव्यवस्था में "व्यापारिक पुलिस" और "न्यायाधीश" दोनों की भूमिका निभाता है, ताकि शक्ति के बजाय कानून के शासन से विश्व व्यापार को स्थिरता मिल सके.