चीन ने 80 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला
बीजिंग । डेस्क: चीन ने मानव इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक 'अत्यधिक गरीबी' को समाप्त करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है. हाल ही में आयोजित वैश्विक गरीबी उन्मूलन और विकास मंच 2026 के दौरान वैश्विक विशेषज्ञों और विचारकों ने चीन के इस प्रयास की सराहना की है. इस वर्ष चीन की व्यवस्थित गरीबी उन्मूलन पहलों की 40वीं वर्षगांठ और पूर्वी-पश्चिमी क्षेत्रों के बीच गरीबी उन्मूलन सहयोग की 30वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. ऐसे में चीन की इस यात्रा और इसके वैश्विक प्रभाव पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ने पिछले कुछ दशकों में 80 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकाला है, जो इतिहास में एक बेमिसाल रिकॉर्ड है. यह सफलता केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों को सुदृढ़ किया है.
इस अभियान के तहत भोजन, आवास, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार जैसे आवश्यक क्षेत्रों में व्यापक सुधार देखा गया है. पाकिस्तानी विद्वान हसन दाउद बट ने इस बात पर जोर दिया कि चीन ने एक 'जन-केंद्रित' दृष्टिकोण अपनाया, जो पारंपरिक पश्चिमी सहायता ढाँचे से बिल्कुल अलग है.
चीन की रणनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इसने लोगों को केवल सहायता देने के बजाय उनमें आत्मनिर्भर बनने की क्षमता विकसित की. कंबोडियन विशेषज्ञ चेया मुन्यरिथ के मुताबिक, चीन ने गरीबी उन्मूलन को लोगों की स्व-प्रेरणा और व्यावहारिक कौशल से जोड़ा, जिससे कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रहने की आदत से बचा जा सका.
चीन का अनुभव यह सिखाता है कि गरीबी उन्मूलन केवल बाहरी मदद पर निर्भर नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक तंत्र की आवश्यकता होती है.
ब्राजील के प्रोफेसर इवांद्रो मेनेजेस डी कार्वाल्हो ने कहा कि चीन ने गरीबी को एक बहुआयामी समस्या के रूप में देखा, जो खराब बुनियादी ढांचे, शिक्षा की कमी और कमजोर बाजार व्यवस्था का परिणाम थी. इसलिए, चीन ने इसे एक राष्ट्रीय रणनीति का दर्जा दिया.
इस अभियान में 'लक्षित गरीबी उन्मूलन' (टारगेटेड पॉवर्टी एलिविएशन) सबसे बड़ा नवाचार साबित हुआ. इस डेटा-संचालित पद्धति के माध्यम से गरीब परिवारों की सटीक पहचान की गई और उनकी जरूरतों के हिसाब से सहायता प्रदान की गई. इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुंच में बड़ा सुधार हुआ.
इस आक्रामक और सटीक नीति का परिणाम यह हुआ कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा के गरीबी उन्मूलन लक्ष्य को समय सीमा से 10 साल पहले ही हासिल कर लिया. दुनिया भर में हुई कुल गरीबी कमी में चीन का योगदान 70 प्रतिशत से अधिक रहा है.
अब चीन अपनी इस सफलता को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु (ग्लोबल पब्लिक गुड) के रूप में दुनिया के साथ साझा कर रहा है. इसी सिलसिले में चीन ने 53 देशों और 9 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर 'ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर पॉवर्टी एलिविएशन एंड डेवलपमेंट' की शुरुआत की है, जो अनुभवों और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान का एक बड़ा मंच बनेगा.
इतना ही नहीं, चीन की 'जुनकाओ' (Juncao) जैसी कृषि तकनीकों ने दुनिया के 100 से अधिक देशों में मशरूम उत्पादन और आजीविका सुधार में मदद की है.
अफ्रीकी विज्ञान अकादमी के फेलो फेलिक्स डापारे डाकोरा ने बताया कि चीन ने अफ्रीका में 20 से अधिक कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शन केंद्र स्थापित किए हैं और 300 से अधिक तकनीकें साझा की हैं. चीन ने न केवल खुद को गरीबी से मुक्त किया है, बल्कि वैश्विक गरीबी शासन और मानवता के साझा विकास के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप भी तैयार कर दिया है.