2.8 बिलियन आबादी वाले चीन-भारत दुनिया की प्रमुख शक्ति: वांग यी
नई दिल्ली । चाइना पीपुल्स डेली: चीन और भारत ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति बनाए रखने पर सहमति जताई है. यह सहमति चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उनके भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के बीच हुई बातचीत के दौरान बनी.
वांग यी, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पॉलिट ब्यूरो के सदस्य भी हैं, ने कहा कि विश्व तेजी से बदल रहा है, एकतरफा धौंसपट्टी बढ़ रही है, और मुक्त व्यापार तथा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, और मानवता विश्व के भविष्य को तय करने वाले एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है.
2.8 बिलियन से अधिक की संयुक्त आबादी वाले दो सबसे बड़े विकासशील देशों के रूप में, वांग ने कहा कि चीन और भारत को वैश्विक जिम्मेदारी निभानी चाहिए, प्रमुख शक्तियों के रूप में कार्य करना चाहिए, और एकता के माध्यम से ताकत हासिल करने वाले विकासशील देशों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए. उन्होंने विश्व के बहुध्रुवीकरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देने में दोनों देशों की भूमिका पर जोर दिया.
वांग ने उल्लेख किया कि दोनों देश अपने नेताओं द्वारा पहुंची गई सहमति को लागू कर रहे हैं, विभिन्न स्तरों पर आदान-प्रदान और संवाद को फिर से शुरू कर रहे हैं, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रख रहे हैं, और भारतीय तीर्थयात्रियों को चीन के शिजांग में पवित्र स्थलों की यात्रा करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चीन-भारत संबंध सहयोग की ओर लौटने की सकारात्मक प्रवृत्ति दिखा रहे हैं.
इस वर्ष दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है. वांग ने अतीत से सबक लेने का आह्वान किया और दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या खतरे के बजाय भागीदार और अवसर के रूप में देखें. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन मैत्री, ईमानदारी, पारस्परिक लाभ और समावेशिता के सिद्धांतों को कायम रखने के लिए तैयार है ताकि भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध और मैत्रीपूर्ण क्षेत्र का निर्माण किया जा सके.
वांग ने कहा कि दोनों देशों को आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए, अवरोधों को हटाना चाहिए, सहयोग का विस्तार करना चाहिए, और द्विपक्षीय संबंधों की सुधार की गति को मजबूत करना चाहिए ताकि दोनों देशों की पुनर्जनन प्रक्रिया एक-दूसरे के लिए लाभकारी हो और एशिया तथा विश्व के लिए स्थिरता प्रदान करे.
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में, द्विपक्षीय संबंध निम्न स्तर से ऊपर उठे हैं और लगातार बेहतर हो रहे हैं. उन्होंने भारतीय तीर्थयात्रियों को शिजांग में पवित्र स्थलों की यात्रा में सुविधा प्रदान करने के लिए चीन को धन्यवाद दिया और रणनीतिक धारणाओं को बेहतर करने के महत्व पर जोर दिया. सबसे बड़े विकासशील देशों के रूप में, भारत और चीन बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्ध हैं और एक निष्पक्ष, संतुलित बहुध्रुवीय विश्व को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत हैं, साथ ही विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखने के लिए भी.
उन्होंने दोहराया कि ताइवान चीन का हिस्सा है और कहा कि भारत इस 75वीं वर्षगांठ को अवसर के रूप में लेना चाहता है ताकि चीन के साथ राजनीतिक विश्वास को गहरा किया जाए, आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्रों में पारस्परिक लाभकारी सहयोग को मजबूत किया जाए, लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाया जाए, और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखी जाए.
जयशंकर ने कहा कि भारत शंघाई सहयोग संगठन के तियानजिन शिखर सम्मेलन की मेजबानी में चीन को पूर्ण समर्थन देता है और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय तंत्रों में चीन के साथ समन्वय और सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है.
बातचीत के दौरान, दोनों ने आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया.