रायपुर में गणेश पंडालों ने बढ़ाई यातायात की मुसीबत
रायपुर । संवाददाता: गणेशोत्सव के दौरान रायपुर में कई गणेश पंडालों द्वारा जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है. शहर की सड़कों पर पंडाल बनाए जाने से यातायात में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है.
कटोरा तालाब, तेलीबांधा और एक्सप्रेसवे ब्रिज के नीचे जैसे स्थानों पर पंडालों ने सड़कों को संकरा कर दिया है या पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है.
रायपुर जिला कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने कहा, "हम इस मामले को देखेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे." प्रशासन और पुलिस ने हाल ही में एक संयुक्त बैठक में पंडाल आयोजकों को चेतावनी दी थी कि यातायात में बाधा डालने वाले पंडालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दिशा-निर्देशों में रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के उपयोग पर रोक, पंडाल लगाने से पहले अनुमति लेना, सीसीटीवी कैमरे और भीड़ प्रबंधन के लिए स्वयंसेवकों की अनिवार्यता जैसे नियम शामिल हैं.
स्थानीय निवासियों ने यातायात की समस्याओं की शिकायत की है. टेकारी के निवासी इक्ष्वाकु शरण ने बताया कि लोधीपारा रोड और पंडरी की ओर जाने वाली सड़कों पर भारी जाम के कारण उन्हें 3 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी. उन्होंने कहा, "लोधीपारा के पास एक सड़क पूरी तरह से पंडाल के कारण बंद है, जिससे दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया."
इसी तरह, संजय सिंह ठाकुर ने बताया कि चौबे कॉलोनी से मठपारा तक की यात्रा में उन्हें कई घंटे लगे. स्टेशन रोड, जो एमजी रोड, फाफाडीह और रेलवे स्टेशन से जुड़ती है, वहां भी पंडालों और सड़क पर खड़े वाहनों ने स्थिति को और बदतर कर दिया.
प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन के लिए महादेव घाट तालाब को नामित किया है और विसर्जन जुलूसों में हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है. इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित स्वयंसेवक और सुरक्षित बिजली व्यवस्था अनिवार्य की गई है. आयोजकों को अपने सभी सदस्यों और स्वयंसेवकों का विवरण प्रशासन को देना होगा.
हाईकोर्ट में लगी थी जनहित याचिका
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर जनहित याचिका लगाई गई थी. यह जनहित याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा उनकी अधिवक्ता अदिति सिंघवी के माध्यम से दायर की गई थी. याचिका में बताया गया कि रायपुर शहर में बीते तीन वर्षों के दौरान गणेश और दुर्गा उत्सवों में कई स्थानों पर बिना किसी अनुमति के पंडाल लगाए गए. कलेक्टर और नगर निगम से इस संबंध में जानकारी ली गई, जिन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आयोजन के लिए उनकी ओर से अनुमति नहीं दी गई थी.
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ऐसे आयोजन सार्वजनिक मार्गों और तंग गलियों में बगैर अनुमति किए जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और आम नागरिकों को परेशानी होती है. शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने कोर्ट को बताया कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में कई विभागों की सहभागिता आवश्यक है, जिस कारण समय चाहिए.
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब तक नई नीति नहीं बन जाती, तब तक पूर्व में जारी दिशा-निर्देश ही लागू रहेंगे. वर्तमान में 22 अप्रैल 2022 को गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत किसी भी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या अन्य सार्वजनिक आयोजन के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है. अनुमति के लिए निर्धारित फॉर्म में आवेदन और शपथ पत्र देना जरूरी है, जिससे सुरक्षा और यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके.
त्योहारी सीजन में सड़कों पर बगैर अनुमति लगाए जाने वाले पंडाल, रैली और अन्य आयोजनों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि वो इस विषय में नीति तैयार करे और इसके लिए उसे 6 सप्ताह का समय दिया गया है.अगली सुनवाई अब 2 सितंबर 2025 को होगी.
तस्वीरः प्रतीकात्मक