जशपुर: टमाटर कौड़ियों के दाम, लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं किसान
जशपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में टमाटर की बंपर पैदावार इस बार किसानों के लिए खुशहाली के बजाय आर्थिक संकट लेकर आई है. बीते कुछ महीनों तक जो टमाटर 50 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा था, उसकी कीमतें अब गिरकर महज 5 रुपये प्रति किलो तक सिमट गई हैं.
मार्च महीने के मध्य से शुरू हुई गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे स्थानीय किसानों के सामने अपनी लागत वसूलने की भी चुनौती खड़ी हो गई है.
बाजार के जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों की मंडियों से मांग में आई भारी कमी इस गिरावट का मुख्य कारण है.
बाहरी मांग घटने से मालवाहक गाड़ियां खाली खड़ी हैं और कई व्यापारियों को भारी घाटे के बीच अपना स्टॉक खपाना पड़ रहा है.
वर्तमान में स्थिति यह है कि किसान अपनी उपज को करीब 120 रुपये प्रति क्रेट की दर से बेचने को विवश हैं. बागबहार क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस मामूली कीमत से खेत की जुताई और खाद-बीज का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है, लेकिन फसल को खेतों में सड़ने देने के बजाय वे उसे कम दाम पर बेचना ही बेहतर समझ रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि जशपुर जिला टमाटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, जहाँ रबी और खरीफ दोनों सीजन मिलाकर लगभग 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है.
इस समय रबी सीजन की फसल बाजार में पूरी तरह आ चुकी है, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर ने कीमतों को जमीन पर ला दिया है. लु
ड़ेग और आसपास के क्षेत्रों के किसान अब फसल की तुड़ाई में भी देरी कर रहे हैं, ताकि बाजार में स्थिति सुधरने की कोई गुंजाइश बन सके. फिलहाल, स्थानीय खपत के भरोसे टिका बाजार किसानों को कोई राहत देता नजर नहीं आ रहा है.