GST Tribunal के गठन तक जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिली राहत
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन तक वैधानिक अपील दायर करने के लिये प्रतीक्षा करने की अनुमति दी है. यह फैसला 24 जुलाई 2025 को जस्टिस दीपक कुमार तिवारी द्वारा सुनाया गया, जिसमें कंपनी को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अधिनियम, 2017 की धारा 112 के तहत दूसरी अपील दायर करने की छूट दी गई है.
कंपनी ने संयुक्त आयुक्त (अपील), राज्य कर, रायपुर द्वारा 6 मार्च 2025 को पारित अपीलीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विवादित कर मांग को बरकरार रखा गया था. जीएसटी ट्रिब्यूनल के अभी तक कार्यशील न होने के कारण, जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने हाईकोर्ट से मामले को पुनर्विचार के लिये वापस भेजने या ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने तक आदेश के अमल पर रोक लगाने की मांग की थी.
कोर्ट ने एमएस दिव्या स्टील्स बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में दिये गये पिछले फैसले का हवाला देते हुये कहा कि संस्थागत देरी के कारण करदाता को अपील के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के 3 दिसंबर 2019 के आदेश संख्या 09/2019 का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष या राज्य अध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने की तारीख से ही अपील दायर करने की समय-सीमा शुरू होगी.
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ में जीएसटीएटी के अधिसूचित होने के बावजूद, प्रमुख पदों पर नियुक्तियां अभी तक नहीं हुई हैं, जिसके कारण अपीलीय मंच कार्यशील नहीं है. इस तर्क का राज्य ने विरोध नहीं किया.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिया कि जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष या राज्य अध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने के बाद वैधानिक अपील दायर कर सकता है.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपील लंबित रहने के दौरान जीएसटी अधिनियम की धारा 112(9) के तहत वैधानिक रोक प्रभावी रहेगी.
हालांकि, यदि कंपनी ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने के बाद निर्धारित समय-सीमा में अपील दायर करने या इस आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर आवश्यक प्री-डिपॉजिट करने में विफल रहती है, तो कोर्ट द्वारा दी गई सुरक्षा समाप्त हो जायेगी, और राज्य को वसूली की कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता होगी.