छत्तीसगढ़ में शुरू होगा NTPC का परमाणु बिजली संयंत्र
नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश की सरकारों ने देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी एनटीपीसी को परमाणु बिजली संयंत्र (न्यूक्लियर पावर प्लांट) बनाने के लिए जमीन देने का वादा किया है. यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है. ये संयंत्र एनटीपीसी की नई कंपनी, एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड के तहत बनाए जाएंगे, और ये इसके पहले स्वतंत्र प्रोजेक्ट होंगे.
इन तीनों राज्यों ने संयंत्र के लिए जमीन की पहचान कर ली है. अब एनटीपीसी ने राज्यों से पानी की उपलब्धता और उसकी निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन मांगा है. इसके बाद जमीन की भू-तकनीकी जांच शुरू होगी.
एक परमाणु संयंत्र, जिसमें दो 700 मेगावाट के रिएक्टर हों, को हर साल 70 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है. यह इतना पानी है कि इससे 28,000 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं या सात लाख लोगों को एक साल तक रोज 100 लीटर पानी मिल सकता है.
कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र भी इतना ही या इससे ज्यादा पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन परमाणु संयंत्र पर्यावरण के लिए ज्यादा साफ-सुथरे होते हैं.
1400 मेगावाट का एक परमाणु संयंत्र हर साल लगभग 90 लाख भारतीय घरों को बिजली दे सकता है, अगर मान लिया जाए कि एक घर सालाना 1200 किलोवाट-घंटा बिजली खर्च करता है.
एनटीपीसी अगले 20 साल में परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर कम से कम 60 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है.
भारत का लक्ष्य है कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए, जिसमें से एनटीपीसी को 30 गीगावाट का योगदान देना है.
इसके लिए कंपनी प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर्स (पीएचडब्ल्यूआर) और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करेगी.
इन प्रोजेक्ट्स की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है, लेकिन सरकार परमाणु संयंत्र बनाने में लगने वाले समय को 13 साल से घटाकर 8 साल करने की कोशिश कर रही है. ये प्रोजेक्ट राजस्थान के माही बांसवाड़ा प्रोजेक्ट से अलग होंगे, जो एनटीपीसी और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर बनाया जा रहा है.
भारत की मौजूदा परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.8 गीगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22.48 गीगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है.
इसके लिए सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया है, जो स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीकों पर शोध और विकास के लिए है.