सावधान! खत्म हो रही हैं दवाइयां: अब मामूली संक्रमण भी होगा जानलेवा
सीजीखबर डेस्क: भारत समेत पूरी दुनिया एक ऐसे खौफनाक भविष्य की ओर बढ़ रही है जहाँ मामूली सर्दी-जुकाम या गले का संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की ताज़ा रिपोर्ट ने देश में Antimicrobial Resistance (AMR) के बढ़ते खतरे को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले मुख्य बैक्टीरिया अब 'सुपरबग' बन चुके हैं और उन पर सबसे शक्तिशाली दवाओं का भी असर खत्म होता जा रहा है.
ICMR के अध्ययन में पाया गया कि ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन (BSIs) के लिए जिम्मेदार दो सबसे घातक बैक्टीरिया, Klebsiella pneumoniae और Acinetobacter baumannii, अब Imipenem जैसी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति भारी प्रतिरोध (Resistance) दिखा रहे हैं. इसी तरह, Staphylococcus aureus और Enterococcus faecium जैसे बैक्टीरिया पर अब Oxacillin और Vancomycin जैसी दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं.
सबसे चिंताजनक स्थिति Acinetobacter baumannii को लेकर है, जहाँ साल 2023 में Carbapenems के प्रति प्रतिरोध दर 88 प्रतिशत तक पहुँच गई है. इसका मतलब है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के लिए अब डॉक्टरों के पास शायद ही कोई प्रभावी विकल्प बचा हो. अध्ययन यह भी बताता है कि E. coli के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Piperacillin-tazobactam और Carbapenems जैसी दवाओं के खिलाफ भी पिछले सात वर्षों में प्रतिरोध तेजी से बढ़ा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट प्राकृतिक से ज्यादा मानव-निर्मित है. एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल, विशेष रूप से वायरल बीमारियों में इनका उपयोग और बिना डॉक्टरी सलाह के 'ओवर-द-काउंटर' दवाओं की उपलब्धता ने इस 'साइलेंट किलर' को जन्म दिया है.
इस भयावह स्थिति को देखते हुए ICMR ने केंद्र सरकार और Drug Controller General of India (DCGI) को सख्त सिफारिश भेजी है. इसके तहत नई लॉन्च होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री को केवल चुनिंदा अस्पताल फार्मेसियों तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है ताकि इनके दुरुपयोग को रोका जा सके.
प्रधानमंत्री ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में इस खतरे के प्रति आगाह किया है. अगर आज हम नहीं संभले, तो अगली पीढ़ी के लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दशकों पुराने चमत्कार मिट्टी में मिल जाएंगे.