ईरान में सत्ता परिवर्तन क्या केवल सैन्य ताकत के दम पर लक्ष्य हासिल कर पाएगा इज़राइल?
इज़राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकने को फिर से अपना प्राथमिक लक्ष्य घोषित किया है. हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक स्पष्टता, जमीनी सेना और अमेरिकी समर्थन के बिना सत्ता परिवर्तन का यह उद्देश्य बेहद जटिल और अनिश्चित है.
नई दिल्ली । डेस्क: इज़राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर दोहराया है कि ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकना इज़राइल का प्राथमिक उद्देश्य बना हुआ है. आगामी राष्ट्रीय चुनावों से ठीक पहले और ढलते जनसमर्थन के बीच उनका यह बयान सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा प्रमुख पीट हेगसेथ के साथ बातचीत के बावजूद, वाशिंगटन द्वारा किसी नए सैन्य अभियान या ईरान में शासन बदलने की योजना में शामिल होने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है.
विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि इज़राइल के पास ईरान को भारी नुकसान पहुँचाने की सैन्य क्षमता है, लेकिन इस सैन्य बढ़त को सत्ता परिवर्तन में बदलने के लिए उसके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है.
हवाई हमले और जमीनी चुनौती की सीमाएं
इज़राइल की आक्रामक हथियार प्रणालियाँ और हवा में ईंधन भरने की क्षमताएँ उसे हवाई श्रेष्ठता प्रदान करती हैं. इसके बावजूद, विशेषज्ञ इस बात पर संदेह जताते हैं कि केवल बमबारी से सत्ता परिवर्तन संभव है. विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई हमले सैन्य क्षमताओं को कमजोर तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं कर सकते. सत्ता बदलने के लिए जमीनी स्तर पर सेना की तैनाती और सालों तक वहां टिके रहने की आवश्यकता होगी, जिसके लिए व्यापक सैन्य प्रतिबद्धता की जरूरत है.
ईरान का पलटवार और रणनीतिक क्षमता
ईरान के पास अभी भी मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा भंडार मौजूद है, जो किसी भी हमले का करारा जवाब देने में सक्षम है. इज़राइल के लिए लगातार रक्षात्मक स्थिति बनाए रखना वित्तीय और रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सस्ते ईरानी ड्रोनों को रोकने के लिए महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करना पड़ता है. इसके अलावा, खुफिया तंत्र और साइबर हमलों का बार-बार इस्तेमाल करने से उनके उजागर होने और नष्ट होने का जोखिम बना रहता है.
अमेरिकी समर्थन पर अनिश्चितता
वाशिंगटन की इस अभियान में भागीदारी को लेकर विश्लेषक काफी संशय में हैं. अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के माहौल में वाशिंगटन नए सैन्य तनाव से बचना चाहता है. बिना अमेरिकी समर्थन के, इज़राइल के पास गहराई में छिपे ठिकानों को नष्ट करने वाले भारी बंकर-बस्टिंग बमों की कमी रहेगी. यदि इज़राइल अकेले हमला करता है, तो ईरान अपने पलटवार को केवल इज़राइली क्षेत्रों तक सीमित रखकर अमेरिका को सीधे युद्ध में शामिल होने से रोक सकता है.
सैन्य तबाही और राजनीतिक बदलाव लाने की क्षमता के बीच का यह बड़ा अंतर ही इज़राइल के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है.