कैलिफोर्निया में बने रहने के लिए मार्क जुकरबर्ग को मिलेंगे मेटा के नए शेयर
अरबपतियों पर प्रस्तावित वेल्थ टैक्स (Proposition 40) के बीच मेटा ने अपने सीईओ मार्क जुकरबर्ग को कैलिफोर्निया में बनाए रखने के लिए नए शेयरों का खास सौदा किया है. जानिए क्या है यह पूरा मामला और इससे जुकरबर्ग के वोटिंग पावर पर क्या असर पड़ेगा.
सैन फ्रांसिस्को । डेस्क: सोशल मीडिया दिग्गज 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग अगले आठ वर्षों तक कैलिफोर्निया में ही बने रहेंगे. कंपनी ने उन्हें राज्य में रोके रखने के लिए एक विशेष वित्तीय समझौता किया है, जिसके तहत जुकरबर्ग को मेटा में नए शेयरों का एक बड़ा हिस्सा दिया जाएगा.
यह कदम कैलिफोर्निया में आगामी नवंबर के चुनावों में अरबपतियों की संपत्ति पर प्रस्तावित अस्थायी कर 'प्रोपोज़िशन 40' के मद्देनजर उठाया गया है. यदि कैलिफोर्निया के मतदाता इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो राज्य के अरबपतियों पर 5 प्रतिशत का एकमुश्त टैक्स लागू होगा. इससे प्राप्त होने वाली 90 प्रतिशत राशि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की जाएगी. मेटा ने एक प्रतिभूति फाइलिंग (Securities Filing) में आशंका जताई थी कि यदि जुकरबर्ग को भारी-भरकम टैक्स चुकाने के लिए अपने शेयर बेचने पड़े, तो कंपनी में उनका वोटिंग अधिकार 60 प्रतिशत से घटकर 53 प्रतिशत या उससे कम हो सकता है.
कंपनी द्वारा तैयार किए गए इस नए सौदे के तहत नॉन-वोटिंग शेयरों की एक नई श्रेणी बनाई जाएगी और सभी मौजूदा शेयरधारकों को उनके प्रत्येक शेयर पर एकमुश्त लाभ दिया जाएगा. इससे जुकरबर्ग टैक्स का भुगतान करने के लिए अपने शेयर बेच सकेंगे और कंपनी पर उनका नियंत्रण व वोटिंग पावर भी प्रभावित नहीं होगा.
उल्लेखनीय है कि कैलिफोर्निया में प्रस्तावित इस वेल्थ टैक्स से बचने के लिए गूगल के संस्थापक सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज तथा पेपैल के सह-संस्थापक पीटर थील जैसे कई बड़े उद्योगपति पहले ही राज्य से पलायन कर चुके हैं. वहीं दूसरी ओर, एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने इस टैक्स को लेकर कोई चिंता व्यक्त नहीं की है और कहा है कि अधिक कमाई पर अधिक टैक्स देना स्वाभाविक है तथा वे टैक्स देने से पीछे नहीं हटेंगे.
क्या है प्रोपोज़िशन 40 (Proposition 40)?
प्रोपोज़िशन 40 कैलिफोर्निया राज्य का एक प्रस्तावित कानून है, जिसे राज्य में 'वेल्थ टैक्स' (संपत्ति कर) या 'बिलियनेयर टैक्स' के नाम से जाना जाता है. इस पर राज्य के मतदाता वोट देकर फैसला करेंगे कि इसे लागू किया जाए या नहीं.
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य कैलिफोर्निया में रहने वाले अरबपतियों (जिनकी कुल संपत्ति 1 अरब डॉलर यानी लगभग 8,300 करोड़ रुपये से अधिक है) पर 5 प्रतिशत का एकमुश्त (one-time) टैक्स लगाना है. इस टैक्स से मिलने वाले राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी अस्पतालों और गरीब कल्याण योजनाओं के लिए खर्च किया जाएगा.
तकनीक और व्यापार की दुनिया में यह प्रस्ताव एक बड़ा विवाद बन गया है. इसका कारण यह है कि अमेरिका में अब तक किसी राज्य ने व्यक्तिगत कुल संपत्ति (Net Worth) पर इस तरह का सीधा टैक्स नहीं लगाया है. यदि यह कानून पास होता है, तो मार्क जुकरबर्ग जैसे अरबपतियों को अपनी शेयर होल्डिंग्स पर अरबों डॉलर का टैक्स चुकाना पड़ेगा. इसी टैक्स देनदारी और कंपनी नियंत्रण खोने के डर से मेटा जैसी कंपनियों को अपने सीईओ को रोके रखने के लिए विशेष समझौते करने पड़ रहे हैं.
कैलिफोर्निया का 'प्रोपोज़िशन 40' (वेल्थ टैक्स) अमेरिका का पहला ऐसा प्रस्तावित राज्य स्तरीय कानून है जो व्यक्तिगत शुद्ध संपत्ति (Net Worth) पर टैक्स लगाने की बात करता है. 1 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले उद्योगपतियों पर 5% का एकमुश्त कर लगाने के इस प्रस्ताव ने सिलिकॉन वैली के उद्योगपतियों को दो गुटों में बांट दिया है:
1. राज्य छोड़कर जाने और विरोध करने वाले दिग्गज
गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज, पेपैल के पीटर थील तथा उबर के पूर्व सीईओ ट्रैविस कलानिक जैसे दिग्गजों ने इस टैक्स की कट-ऑफ तारीख से पहले ही कैलिफोर्निया छोड़कर अन्य राज्यों (जैसे फ्लोरिडा या टेक्सस) में अपना ठिकाना बना लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्गेई ब्रिन ने इस कानून के खिलाफ अभियान चलाने के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि खर्च की है, क्योंकि लागू होने पर उन्हें खुद लगभग 13 अरब डॉलर का टैक्स चुकाना पड़ सकता है.
2. नियंत्रण बचाकर राज्य में रुकने वाले दिग्गज (मार्क जुकरबर्ग)
मार्क जुकरबर्ग ने कैलिफोर्निया में ही रुकने का निर्णय लिया है. हालांकि, यदि प्रोपोज़िशन 40 पास होता है, तो उन्हें भारी-भरकम टैक्स चुकाने के लिए अपने शेयर बेचने पड़ेंगे. टैक्स देने के बाद भी मेटा पर उनका बहुमत नियंत्रण बना रहे, इसके लिए कंपनी ने उन्हें विशेष 'नॉन-वोटिंग शेयर' देने का एक वित्तीय समझौता किया है.
3. खुलकर समर्थन करने वाले दिग्गज (जेन्सेन हुआंग)
दूसरी तरफ एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग का रुख एकदम अलग है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे टैक्स से बचने के लिए कैलिफोर्निया छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. यदि प्रोपोज़िशन 40 लागू होता है, तो हुआंग को लगभग 8 अरब डॉलर का टैक्स चुकाना होगा. उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि इतनी बड़ी रकम टैक्स में देना उनके लिए सम्मान (Privilege) की बात है और अधिक कमाई पर अधिक टैक्स देना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.