गाजा युद्ध के बीच यूरोप में तेज हुआ इजरायली उत्पादों का बहिष्कार
नई दिल्ली । डेस्क: आयरलैंड के एक तटीय शहर न्यूकैसल से शुरू हुआ एक व्यक्तिगत विरोध अब पूरे यूरोप में एक बड़े श्रमिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. मामला पिछले साल अगस्त का है, जब टेस्को सुपरमार्केट के एक कर्मचारी ने गाजा में जारी मानवीय संकट और भीषण बमबारी से विचलित होकर इजरायली फलों और सब्जियों को स्कैन करने से मना कर दिया था.
कर्मचारी का कहना था कि वह अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर इन सामानों की बिक्री का हिस्सा नहीं बन सकता. हालांकि शुरुआत में कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया था, लेकिन ट्रेड यूनियनों और स्थानीय जनता के भारी दबाव के बाद उसे जनवरी में इस शर्त पर बहाल किया गया कि उसे इजरायली सामान नहीं संभालना पड़ेगा.
यह घटना अब यूरोप में एक 'टेस्ट केस' बन गई है, जहां श्रमिक संगठन यह तर्क दे रहे हैं कि किसी भी कर्मचारी को नैतिक आधार पर इजरायली उत्पादों के बहिष्कार के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. आयरलैंड, ब्रिटेन और नॉर्वे की यूनियनों ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए हैं, जबकि ब्रिटेन के 'को-ऑप' जैसे बड़े रिटेल स्टोर ने कुछ इजरायली उत्पादों को अपने शेल्फ से हटा दिया है.
कार्यकर्ता इस आंदोलन की तुलना 1984 के उस प्रसिद्ध डन्स स्टोर्स हड़ताल से कर रहे हैं, जिसने अंततः आयरलैंड को दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद शासन के खिलाफ व्यापार प्रतिबंध लगाने वाला पहला पश्चिमी देश बना दिया था.
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ते इस दबाव का असर अब राज्य स्तर की नीतियों में भी दिखने लगा है. स्लोवेनिया ने अगस्त 2025 में इजरायली बस्तियों से आने वाले सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद स्पेन ने भी 2026 की शुरुआत से इसे लागू कर दिया है.
नीदरलैंड और आयरलैंड में भी इसी तरह के कानूनी प्रस्तावों पर बहस तेज है.
हालांकि, इस बहिष्कार आंदोलन को रोकने के लिए 'बनेई ब्रित इंटरनेशनल' और 'एलनेट' जैसे इजरायल समर्थक संगठन भी सक्रिय हैं, जो इसे यहूदी विरोधी बता रहे हैं और सरकारों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे इस तरह के आर्थिक प्रतिबंधों को अवैध घोषित करें. फिलहाल, यह संघर्ष दुकानों के चेकआउट काउंटर से निकलकर यूरोप की संसद की दहलीज तक पहुँच गया है.