बिहार चुनाव: हार के पीछे तीन कारण- दीपंकर भट्टाचार्य
पटना । डेस्क: CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने रविवार 16 नवंबर, 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को "असामान्य" बताते हुए दावा किया कि यह तीन "कारणों" का परिणाम है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के घटक दल CPI(ML)L को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, जहाँ उसने 20 सीटों में से सिर्फ दो पर जीत हासिल की है, जबकि 2020 के चुनावों में उसे 19 में से 12 सीटें मिली थीं.
दीपंकर भट्टाचार्य के अनुसार, ये तीन कारण हैं:
₹10,000 का महिला रोजगार योजना हस्तांतरण: उन्होंने दावा किया कि मतदान की तारीखों की घोषणा तब तक नहीं की गई जब तक कि महिलाओं के लिए ₹10,000 के प्रावधान सहित सभी लक्षित कल्याणकारी योजनाएँ लागू नहीं हो गईं. उन्होंने इसे "भारत के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व और अनोखा प्रयोग" बताया.
SIR में मतदाता सूची में बदलाव: दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से 65 लाख वोटों को हटाना और चुनावों से ठीक पहले 3.5-4 लाख वोटों को जोड़ना नतीजों पर असर डालने वाला "बिहार की प्रयोगशाला में दूसरा बड़ा प्रयोग" था.
कॉर्पोरेट घराने को रियायती दर पर जमीन का हस्तांतरण: भट्टाचार्य ने एक कॉर्पोरेट घराने को "कौड़ियों के दाम" पर जमीन हस्तांतरित करने को तीसरा प्रयोग करार दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन लोगों पर इसका कोई असर नहीं हुआ.
CPI(ML)L नेता ने जोर देकर कहा कि ये "तीन प्रयोग" आने वाले समय में भारतीय राजनीति को तय कर सकते हैं. उन्होंने परिणामों को "असामान्य, हमारी आशाओं और समझ से परे" बताते हुए कहा कि पार्टी और गठबंधन भविष्य की कार्रवाई तय करने के लिए इस पहलू पर विचार-विमर्श करेंगे.
भट्टाचार्य ने कहा, "18 से 24 नवंबर तक, हमारे उम्मीदवार और पार्टी कार्यकर्ता फीडबैक और जनसंपर्क अभ्यास के हिस्से के रूप में लोगों के बीच जाएँगे." उन्होंने चेतावनी दी, "हमें इन प्रयोगों को रोकना होगा अन्यथा, राजनीति में कोई समान अवसर नहीं रहेगा."
उन्होंने 2010 के बिहार चुनावों से तुलना करते हुए कहा कि तब NDA ने समान जीत हासिल की थी, "(तब) नीतीश कुमार का उदय हो रहा था. लेकिन इस बार, केंद्र में NDA सरकार के प्रति भावनाओं के साथ-साथ उनकी सरकार का भी पतन हो रहा है."
CPI(ML)L महासचिव ने चुनावी राजनीति में विसंगति की ओर भी इशारा किया, जहाँ अक्सर वोट प्रतिशत और जीती गई सीटों की संख्या में बेमेल होता है. उन्होंने कहा, "2020 के चुनावों के बाद से हमारे वोट कमोबेश उतने ही रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या में गिरावट आई है."