बिहार चुनाव: लेफ्ट का 'असामान्य' प्रदर्शन,सीटें 16 से 3 हुई
पटना । डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार महागठबंधन के सहयोगी वाम दलों को बड़ा झटका लगा है. 2020 के पिछले चुनाव में 16 सीटें जीतने वाले लेफ्ट का प्रदर्शन इस बार निराशाजनक रहा और उनकी सीटों की संख्या सिर्फ तीन रह गई.
वाम दलों में सबसे ज़्यादा नुक्सान CPI(ML) लिबरेशन को हुआ है. पिछली बार 19 सीटों पर लड़कर 12 सीटें जीतने वाली लिबरेशन इस बार 21 सीटों पर चुनाव लड़ी और केवल दो पर ही जीत हासिल कर सकी.
CPI कोई भी सीट नहीं जीत पाई, जबकि CPM के उम्मीदवार अजय कुमार ने विभूतिपुर सीट से जीत दर्ज की है.
इस 'असामान्य' चुनावी नतीजे पर लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह परिणाम 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों से मेल नहीं खाता है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ 'विपक्षी गठबंधन का संकट' नहीं, बल्कि 'लोकतंत्र का संकट' है.
भट्टाचार्य ने सीधे तौर पर यह नहीं कहा, लेकिन संकेत दिया कि चुनाव से पहले आखिरी दो महीनों में सरकार द्वारा तीन करोड़ लोगों को 30,000 करोड़ रुपये नकद दिए गए, जो 'घुमा-फिराकर वोट खरीदने जैसा' था.
उन्होंने यह भी माना कि महागठबंधन एसआईआआर के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा में लोगों का जो समर्थन हासिल हुआ था, उसे बनाए नहीं रख सका. सीट बंटवारे को लेकर आखिरी समय तक चला खींचतान भी नतीजों को प्रभावित करने वाला एक 'गौण' कारण रहा.