बांग्लादेश के आर्थिक संकट से अवामी लीग चिंतित
नई दिल्ली । डेस्क: बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी ने मोहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत देश में तेजी से बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की.
पार्टी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "भीड़ की हिंसा और बाजार पतन: युनुस शासन में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था रक्तस्राव कर रही है. कभी उभरती आर्थिक ताकत के रूप में प्रशंसित बांग्लादेश अब निवेश में भारी गिरावट, भीड़ के राज और शासन के शून्य का सामना कर रहा है. 253 हिंसा की घटनायें, 163 लोगों की मौत, 14 साल के निचले स्तर पर विदेशी निवेश, कारखाने बंद हो रहे हैं, और उद्योग हांफ रहे हैं."
एक पुरानी बंगाली कहावत का हवाला देते हुए, अवामी लीग ने कहा, "खाना देने को कुछ नहीं, फिर भी हमेशा हड़ताल के लिये तैयार, यह वर्तमान युनुस शासन को सटीक रूप से परिभाषित करता है."
पार्टी ने बताया कि युनुस के नेतृत्व में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 2018-19 में 3.48 बिलियन डॉलर से घटकर 2024-25 में 910 मिलियन डॉलर हो गया है. पूंजीगत सामानों के लिए क्रेडिट पत्र 27 फीसदी गिर गये, औद्योगिक उत्पादन में कमी आई है, और निवेशक का विश्वास चकनाचूर हो गया है.
पार्टी ने बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के शौकत अजीज रसेल के हवाले से कहा, "1971 में हमने अपने बुद्धिजीवियों को खोया. 2025 में हम अपने उद्यमियों को खो रहे हैं."
अवामी लीग ने व्यवसायी समुदाय की बढ़ती चिंताओं को रेखांकित करते हुये कहा कि यह स्थिति केवल "आर्थिक मंदी" नहीं, बल्कि "तोड़फोड़" का एक कृत्य है. पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या युनुस शासन "दिशा बदलेगा या राष्ट्र को ढहने देगा."
इससे पहले मई में, अवामी लीग ने बताया था कि FDI, जो किसी अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय विश्वास का एक प्रमुख संकेतक है, वर्तमान प्रशासन के तहत "नाटकीय रूप से गिरा" है.
पार्टी के बयान में कहा गया, "महज आठ महीनों में, बांग्लादेश ने FDI में 208 मिलियन डॉलर की गिरावट देखी है. यह पहले से ही संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर झटका है. कानून-व्यवस्था की समस्यायें, राजनीति से प्रेरित हिंसा, और अप्रत्याशित नियामक माहौल ने विदेशी निवेशकों के पलायन में योगदान दिया है."
पार्टी ने आगे कहा, "लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ी हैं, और यहां तक कि पिज्जा हट और बाटा जैसे बहुराष्ट्रीय ब्रांड भी हमलों और व्यवधानों का शिकार हुये हैं. व्यवसायों की रक्षा करने और स्थिरता बहाल करने के लिये हस्तक्षेप करने के बजाय, सरकार काफी हद तक निष्क्रिय रही है, जिससे भय और अनिश्चितता बढ़ रही है."