बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी: मॉब लिंचिंग में एक और की मौत
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दीपू दास और अमृत मंडल के बाद अब बजेंद्र बिस्वास नामक एक और हिंदू युवक की कथित रूप से इस्लामिस्ट भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई है. इस घटना ने राजधानी ढाका समेत पूरे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं.
यह ताजा घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब बांग्लादेश में हिंसा का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है. प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद से ही हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है.
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.
इससे पहले क्रिसमस की पूर्व संध्या पर राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला क्षेत्र में हिंदू युवक अमृत मंडल की हत्या कर दी गई थी. हालांकि स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में यह दावा किया था कि यह सांप्रदायिक हमला नहीं था, बल्कि जबरन वसूली और कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़ा मामला था.
प्रशासन के इस बयान पर भी कई सवाल उठे और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की.
वहीं, एक सप्ताह पहले मयमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और बाद में उनके शव को आग के हवाले कर दिया गया था. उन पर कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे. इस जघन्य हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
दीपु दास की हत्या के बाद ढाका सहित देश के कई हिस्सों में फैक्ट्री मजदूरों, छात्रों और मानवाधिकार संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस मामले में अब तक पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियां 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं. अंतरिम सरकार ने दास के नाबालिग बच्चे, पत्नी और माता-पिता की जिम्मेदारी लेने की घोषणा भी की है.
इन घटनाओं पर भारत ने भी चिंता जाहिर की है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
दूसरी ओर, अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला है.
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार गैर-मुस्लिम समुदायों के खिलाफ “अकल्पनीय अत्याचार” कर रही है और “धार्मिक अल्पसंख्यकों को जिंदा जलाने जैसी भयावह मिसालें” कायम की जा रही हैं.
लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब निगाहें सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे हालात को काबू में लाने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं.