ईरान की सांस्कृतिक विरासत पर हमला सभ्यता मिटाने की कोशिश- प्रो. तूरज दरयाई
तेहरान । डेस्क: फरवरी से जारी इजराइल और अमेरिकी हमलों के कारण ईरान में गोलिस्तान पैलेस से लेकर इसफ़हान, कुर्दिस्तान और लूरिस्तान के ऐतिहासिक क्षेत्रों तक, 130 से अधिक पंजीकृत स्मारकों और संग्रहालयों को भारी नुकसान पहुँचा है. प्राचीन ईरान के प्रसिद्ध इतिहासकार और 'एन्साइक्लोपीडिया ईरानिका' के संपादक प्रो. तूरज दरयाई ने तेहरान टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस सांस्कृतिक विनाश पर गहरा दुख व्यक्त किया है. यहाँ पेश हैं इस साक्षात्कार के मुख्य अंश:
प्रश्न: ईरान में 130 से अधिक सांस्कृतिक स्थलों को पहुंचे नुकसान पर एक इतिहासकार के रूप में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: एक इतिहासकार के रूप में मैं जानता हूँ कि समय के साथ स्मारक विभिन्न कारणों से नष्ट होते रहे हैं. लेकिन जब आप अमेरिकी और इजराइली ताकतों द्वारा सांस्कृतिक स्थलों का जानबूझकर किया गया विनाश देखते हैं, तो यह अधिक तीव्र भावनाओं को जन्म देता है. यह किसी सभ्यता और सांस्कृतिक परंपरा को मिटाने के समान है. 130 से अधिक स्थलों का क्षतिग्रस्त होना कोई छोटी बात नहीं है, यह एक बहुत बड़ा और भयानक नुकसान है.
प्रश्न: क्या यूनेस्को या कोई अन्य अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा इन स्थलों की सुरक्षा या जवाबदेही तय करने में सक्षम है?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय कानूनों को देशों, विशेषकर महाशक्तियों और नियम न मानने वाले राष्ट्रों पर लागू करना बेहद कठिन होता है. हालांकि, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बनने का एक बड़ा लाभ यह है कि इसके रखरखाव, जीर्णोद्धार और प्रचार के लिए अंतरराष्ट्रीय निकायों से निरंतर धन मिलता है. ईरान में 30 यूनेस्को स्थल हैं. हमें एक-एक करके ईरान के अधिक से अधिक ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने का प्रयास करना चाहिए. जब कोई स्थल इस वैश्विक सूची में आ जाता है, तो युद्ध में शामिल सरकारें उस पर हमला करने से पहले दो बार सोचने को मजबूर होती हैं.
प्रश्न: तेहरान के गोलिस्तान पैलेस जैसे गैर-सैन्य स्थल के क्षतिग्रस्त होने से युद्ध की रणनीतियों के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: गोलिस्तान पैलेस जिसे 'ईरान का वर्साय' भी कहा जाता है, संभवतः इसलिए क्षतिग्रस्त हुआ क्योंकि यह किसी ऐसे ठिकाने के पास था जिसे हमलावर महत्वपूर्ण मानते थे. इसे भले ही 'कोलेटरल डैमेज' कहा जाए, लेकिन नुकसान तो नुकसान ही है और यह दुखद व अपूरणीय है. 100 या 200 साल पहले काज़ार काल में कलाकारों द्वारा लगाए गए कांच और शीशों के सैकड़ों-हजारों टुकड़ों को फिर से उसी तरह जोड़ना लगभग असंभव है. गोलिस्तान पैलेस ईरान की शक्ति की परंपरा का प्रतीक रहा है और इसके तख्त तथा इमारत को नुकसान पहुँचाना एक अपराध है.
प्रश्न: आप 'एन्साइक्लोपीडिया ईरानिका' का संपादन कर रहे हैं. क्या इस सांस्कृतिक तबाही ने इसके उद्देश्य को बदल दिया है?
उत्तर: एन्साइक्लोपीडिया ईरानिका का मुख्य मिशन अकादमिक रूप से जानकारी जुटाना और ईरानी दुनिया के इतिहास व संस्कृति को विस्तार से प्रस्तुत करना है. हम राजनीति से ऊपर रहने की कोशिश करते हैं. लेकिन जब सैकड़ों स्मारक नष्ट हो रहे हों, तो इस पर सोचना अनिवार्य हो जाता है. चूंकि हमारे पास अभी गोलिस्तान पैलेस पर कोई विस्तृत प्रविष्टि नहीं थी, इसलिए मैंने तय किया है कि हम इसमें अमेरिकी और इजराइली हमलों के दौरान पैलेस को पहुँचे नुकसान का पूरा ब्यौरा और एक विशेष पैराग्राफ शामिल करेंगे, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को सच मालूम हो सके.
प्रश्न: यदि ऐतिहासिक स्थल इसी तरह नष्ट होते रहे, तो क्या ईरान का इतिहास केवल विदेशी दृष्टिकोण से ही जाना जाएगा?
उत्तर: सासानिद साम्राज्य का उदाहरण हमारे सामने है, जिसका मूल्यांकन हमेशा इसलिए कम किया गया क्योंकि उसका अधिकतर इतिहास केवल रोमन और अरब स्रोतों के माध्यम से ही बचा रहा. जब आपके पास लिखित दस्तावेजों की कमी होती है, तो ये भौतिक स्मारक ही इतिहास के वैकल्पिक रिकॉर्ड के रूप में काम करते हैं. ये स्मारक ईरान के लोगों के लिए अतीत, वर्तमान और भविष्य की स्मृतियों के केंद्र हैं. इन्हें खोना अपनी पहचान के एक बड़े हिस्से को खोने जैसा है.
प्रश्न: क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विनाश की चर्चा होने से जमीनी स्तर पर कोई सुरक्षा मिल पाई है?
उत्तर: युद्ध हर रूप में एक त्रासदी है. इसका एक पहलू यह भी है कि लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति अधिक जागरूक हो जाते हैं. सामान्य दिनों में लोग खुद भी कभी-कभी स्मारकों को नुकसान पहुँचाते हैं या उन पर ग्राफ़िटी बना देते हैं. लेकिन जब किसी बाहरी ताकत द्वारा बमबारी की जाती है, तो यह देशवासियों के अंदर अपनी राष्ट्र की धरोहरों के प्रति एक नई चेतना और सम्मान जगाता है. बाहरी आक्रमण लोगों को अपनी विरासत के प्रति अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनाता है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है.