ब्लैक होल की गूंज को दबा रहे हैं मोबाइल सिग्नल
नई दिल्ली । डेस्क: खगोल भौतिकी के क्षेत्र में एक अनोखी समस्या ने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. मोबाइल फोन और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण ब्लैक होल से आने वाली सूक्ष्म ध्वनियों को सुनना मुश्किल हो रहा है. ये ध्वनियाँ, जिन्हें रेडियो टेलीस्कोप के जरिये पकड़ा जाता है, अंतरिक्ष में पृथ्वी की सटीक स्थिति जानने के लिए बेहद जरूरी हैं.
खगोल भौतिकी के सिद्धांत बताते हैं कि ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना ताकतवर होता है कि यहाँ तक कि प्रकाश भी इसके चंगुल से बच नहीं पाता. इसे एक ऐसे राक्षस की तरह देखा जाता है जो समय और स्थान को भी निगल लेता है. फिर भी, वैज्ञानिक इन ब्लैक होल्स का उपयोग पृथ्वी की स्थिति निर्धारण के लिये करते हैं. इस प्रक्रिया को 'जियोडेसी' कहते हैं. ब्रह्मांड में कोई भी चीज स्थिर नहीं है, सब कुछ गतिमान है. इसलिये, पृथ्वी की सटीक स्थिति जानने के लिए लाखों-करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित ब्लैक होल्स को एक स्थिर बिंदु मानकर उनकी स्थिति के आधार पर गणना की जाती है.
इन ब्लैक होल्स से आने वाली सूक्ष्म तरंगें, जो ब्रह्मांड के सुदूर कोनों से लंबी यात्रा कर पृथ्वी तक पहुँचती हैं, वैज्ञानिकों के लिए एक तरह का नक्शा तैयार करती हैं. जैसे तालाब में पत्थर फेंकने पर लहरें तट तक पहुँचती हैं, वैसे ही ब्रह्मांड में होने वाली घटनायें, जैसे दो विशाल खगोलीय पिंडों का टकराव, ऐसी तरंगें पैदा करता है जो रेडियो टेलीस्कोप तक पहुँचती हैं.
मोबाइल और इंटरनेट की बाधा
हाल के अध्ययनों से पता चला है कि मोबाइल फोन और इंटरनेट के सिग्नल इन रेडियो टेलीस्कोप में ब्लैक होल की कमजोर तरंगों को दबा रहे हैं. जैसे-जैसे इन सिग्नलों की तीव्रता बढ़ रही है, ब्लैक होल की 'गूंज' को पकड़ना मुश्किल होता जा रहा है. यह वैसा ही है जैसे किसी शांत कमरे में धीमी आवाज को सुनने की कोशिश के दौरान तेज हॉर्न की आवाज सारी बात को दबा दे.
वैज्ञानिकों की चिंता यह है कि अगर ब्लैक होल की इन तरंगों को ठीक से पकड़ा न गया, तो पृथ्वी की सटीक स्थिति जानना असंभव हो सकता है. इसका असर हमारे रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ सकता है. इंटरनेट सेवाएँ ठप हो सकती हैं, कृत्रिम उपग्रहों से संपर्क टूट सकता है, और नेविगेशन सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं. यह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये, बल्कि संचार, यातायात और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है.
इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक सरकारों और नीति निर्माताओं से अपील कर रहे हैं कि रेडियो टेलीस्कोप के आसपास के क्षेत्रों में मानव बस्तियों को सीमित किया जाये. साथ ही, इन क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग को कम करने की सलाह दी जा रही है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इन उपायों को अपनाया जाये, तो इस चुनौती से पार पाया जा सकता है.
यह खोज हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ हमें ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के लिए भी संतुलन बनाना होगा. ब्लैक होल की गूंज न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे ग्रह की स्थिति को समझने और भविष्य को सुरक्षित रखने में भी मदद करती है. यह समय है कि हम अपनी तकनीकी प्रगति के साथ-साथ ब्रह्मांड की इस अनमोल धरोहर को भी संरक्षित करें.