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असम के मंत्री का 'गोभी' पोस्ट, भागलपुर नरसंहार की याद दिलाई

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15 नव. 2025, 05:23 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

अशोक सिंघल
अशोक सिंघल

नई दिल्ली । डेस्क: असम के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने फूलगोभी के खेतों की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में लिखा था, "बिहार में गोभी फार्मिंग को मिली मंज़ूरी." यूज़र्स का दावा है कि यह पोस्ट 1989 के भागलपुर दंगों के दौरान हुए "फूलगोभी दफ़न मामले" या लोगैन नरसंहार की एक भयावह घटना का संकेत है.


मंत्री सिंघल ने अपनी पोस्ट के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन कई नेटिज़न्स ने इसे अक्टूबर 1989 में भागलपुर जिले के लोगैन गांव में हुए नरसंहार से जोड़ा है, जब कथित तौर पर 110 से अधिक मुसलमानों को मार दिया गया था और उनके दफ़न किए गए शवों के ऊपर फूलगोभी के पौधे लगा दिए गए थे. तब से, फूलगोभी की छवियों को इस हत्याकांड के एक भयावह अनुस्मारक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है.

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यूज़र्स ने मंत्री की पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. एक एक्स यूज़र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असम के एक कैबिनेट मंत्री "खुले तौर पर बिहार के भागलपुर में मुसलमानों के नरसंहार का महिमामंडन कर रहे हैं और उसे दोहराने का आह्वान कर रहे हैं." 


वहीं, 'डायस्पोरा इन एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी' के एक अन्य एक्स पोस्ट में लिखा गया, "यह एक भयानक इतिहास के साथ हेट स्पीच है. 'गोभी फार्मिंग' 1989 के भागलपुर नरसंहार को याद करती है, जिसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे, कुछ जाँचों से पता चलता है कि मरने वालों की संख्या 2,000 से अधिक हो सकती है." पोस्ट में यह भी कहा गया है कि यह कल्पना "समकालीन दक्षिणपंथी डिजिटल स्पेस में मुसलमानों के खिलाफ उकसावे के रूप में अपनाई गई है."


इससे पहले भी, फूलगोभी की ऐसी छवियों का उपयोग इस साल मार्च में नागपुर हिंसा और मई में छत्तीसगढ़ में माओवादियों के मारे जाने पर भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई द्वारा एक मीम के रूप में किया गया था.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP