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आशा भोसले का निधन

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12 अप्रै. 2026, 07:53 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

आशा भोसले
आशा भोसले

मुंबई | डेस्क: महान पार्श्व गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को मुंबई में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन के साथ ही हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की एक अमर आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली.


परिवार के सदस्यों ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वे उम्र संबंधी बीमारियों और संक्रमण से जूझ रही थीं.


उनके बेटे आनंद भोसले ने जानकारी दी कि अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान पर रखा जाएगा और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने कहा-जो लोग अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, वे कल सुबह 11 बजे उनके घर आ सकते हैं. अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा.


उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और संगीत जगत से लेकर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया.


आशा भोसले का संगीत सफर लगभग आठ दशकों तक फैला रहा, जो अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है. उन्होंने 1940 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में हजारों गीत गाए. माना जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में 12,000 से भी अधिक गानों को अपनी आवाज दी, जो उन्हें दुनिया की सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली गायिकाओं में शामिल करता है.


उनकी गायकी की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी. वे रोमांटिक गीतों से लेकर कैबरे नंबर, ग़ज़ल, भजन और पॉप संगीत तक हर शैली में समान रूप से सफल रहीं. उन्होंने कई महान संगीतकारों के साथ काम किया और हर दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा. उनकी आवाज में एक ऐसी लचक और ऊर्जा थी, जिसने उन्हें हर पीढ़ी के श्रोताओं का प्रिय बना दिया.


अपने असाधारण योगदान के लिए आशा भोसले को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें पद्म विभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रमुख हैं. उनकी उपलब्धियां केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


निजी जीवन


उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर एक प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार और शास्त्रीय गायक थे, जबकि बड़ी बहन लता मंगेश्वकर दुनिया की मशहूर गायिका थीं. 


जब आशा केवल 9 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया, जिससे परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. इस कठिन समय में आशा और लता ने बहुत छोटी उम्र से ही गाना शुरू कर दिया ताकि घर का खर्च चलाया जा सके.


किशोरावस्था में ही आशा भोसले ने परिवार की इच्छा के खिलाफ कदम उठाया और 16 साल की उम्र में उन्होंने लगा मंगेश्कर के सचिव गणपतराव भोसले से शादी कर ली, जो उनसे काफी बड़े थे. यह विवाह परिवार को स्वीकार नहीं था, जिसके कारण कुछ समय तक उनके रिश्तों में दूरी आ गई.


हालांकि इस शादी के बाद उनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहा. उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और अंततः यह संबंध टूट गया. 1960 के आसपास वह अपने बच्चों- हेमंत, वर्षा और आनंद के साथ अलग होकर अपने मायके लौट आईं. इस दौरान धीरे-धीरे परिवार के साथ उनके संबंध फिर से सामान्य होने लगे.


बाद में उनके जीवन में संगीतकार आरडी बर्मन आए. दोनों की मुलाकात 1950 के दशक में हुई थी, और साथ काम करते-करते उनके बीच गहरी समझ और लगाव विकसित हुआ. फिल्मों में साथ काम करने के दौरान यह रिश्ता और मजबूत हुआ और अंततः 1980 में दोनों ने विवाह कर लिया. यह रिश्ता उनके जीवन और करियर दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ.


उनके निधन से केवल फिल्म उद्योग ही नहीं, बल्कि पूरा देश शोक में डूब गया है. सोशल मीडिया पर लाखों प्रशंसक उनके गीतों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं. कई लोगों ने कहा कि आशा भोसले की आवाज केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति थी, जो सीधे दिल तक पहुंचती थी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP