अमित शाह: हिंदी बने विज्ञान, न्याय और पुलिस की भाषा
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच कोई टकराव नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी को न केवल बोलचाल की भाषा के रूप में बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, न्यायपालिका और पुलिस की भाषा के रूप में भी अपनाया जाना चाहिए.
5वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, शाह ने कहा कि भारतीयों को अपनी भाषाओं को संरक्षित करना चाहिए और उन्हें "अमर" बनाना चाहिए. उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ उनकी मातृभाषा में बात करें.
उन्होंने कहा, "माता-पिता को हमेशा बच्चों से उनकी मातृभाषा में बात करनी चाहिए. यह बच्चे के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई मनोवैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने पुष्टि की है कि बच्चा अपनी मातृभाषा में ही सोचता है. यदि आप बच्चे पर मातृभाषा के अलावा कोई अन्य भाषा थोपते हैं, तो उसके दिमाग की 25 से 30 प्रतिशत क्षमता अनुवाद में खर्च हो जाएगी."
शाह ने कहा कि हिंदी केवल बोलचाल या प्रशासन की भाषा नहीं है. उन्होंने कहा, "हिंदी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, न्याय और पुलिस की भाषा भी बनना चाहिए. जब ये सभी कार्य भारतीय भाषाओं में होंगे, तो जनता के साथ स्वतः ही जुड़ाव स्थापित हो जाएगा."
उन्होंने आगे कहा कि संस्कृत ने हमें "ज्ञान की गंगा" दी है, और हिंदी ने इस ज्ञान को हर घर तक पहुंचाया है, जबकि स्थानीय भाषाओं के माध्यम से यह ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचा है.
गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न प्रकार की तकनीकों के माध्यम से स्थानीय भाषाओं को मजबूत करने का काम किया है. गृह मंत्रालय ने भारतीय भाषा अनुभाग (Bhartiya Bhasha Anubhag) बनाया है, जो हिंदी और अन्य भाषाओं को बढ़ावा देगा. उन्होंने कहा, "इसके लिए हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का बहुत उपयोग कर रहे हैं."
शाह ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हिंदी और गुजराती का सह-अस्तित्व रहा है, जो दोनों भाषाओं के विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है.
उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी, दयानंद सरस्वती जैसे नेताओं ने लोगों को एक-दूसरे के साथ संवाद करने और हर राज्य में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया. इसके परिणामस्वरूप, गुजरात का एक बच्चा देश में कहीं भी जा सकता है, व्यापार कर सकता है और स्वीकार्यता प्राप्त कर सकता है."
उन्होंने यह भी बताया कि बहुभाषी अनुवाद सारथी (Bahubhashi Anuvad Sarthi) का उपयोग उन्नत तकनीक द्वारा अनुवाद के लिए किया जा रहा है. "इस सॉफ्टवेयर को प्रशिक्षित करके हम इसे और समृद्ध करेंगे, और आने वाले दिनों में देश के नागरिक अपनी भाषा में संवाद कर सकेंगे," उन्होंने कहा.
शाह ने हिंदी शब्द सिंधु का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 51,000 शब्दों से शुरू हुआ था और अब यह 7 लाख शब्दों को पार कर चुका है. उन्होंने दावा किया कि 2029 तक यह विश्व की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा.
उन्होंने कहा, "मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि 2029 तक यह हिंदी शब्द सिंधु विश्व की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा. इस शब्दकोश के माध्यम से हमने हिंदी को लचीला भी बनाया है. कई हिंदी विद्वान चाहते हैं कि हिंदी संस्कृत-समृद्ध हो. इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन खाली स्थान को भारतीय भाषाओं से भरना होगा. तभी हिंदी भारत के सभी लोगों को अपनी लगेगी."