फ्लाइट AI171 का ब्लैक बॉक्स अमरीका भेजा जायेगा
नई दिल्ली । डेस्क: एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के अहमदाबाद में हुए भीषण हादसे की जांच अब एक नये मोड़ पर पहुंच गई है. 12 जून 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिये उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर क्रैश हो गया था. इस हादसे में 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित जमीन पर 33 लोगों की जान चली गई, जबकि एक यात्री चमत्कारिक रूप से जीवित बच गया. अब इस हादसे के कारणों का पता लगाने के लिये विमान का ब्लैक बॉक्स अमरीका भेजा जाएगा, क्योंकि भारत में इसकी जांच संभव नहीं हो पाई है.
ब्लैक बॉक्स की स्थिति और अमरीका भेजने का कारण
हादसे के बाद बरामद ब्लैक बॉक्स, जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) शामिल हैं, को भारी नुकसान पहुंचा है. सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद लगी आग के कारण ब्लैक बॉक्स इतना क्षतिग्रस्त हो गया कि भारत में इससे डेटा निकालना असंभव है. दिल्ली में विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रयोगशाला, जो पिछले साल स्थापित की गई थी, अभी इतनी सुसज्जित नहीं है कि क्षतिग्रस्त रिकॉर्डर से डेटा निकाला जा सके. इस कारण, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने ब्लैक बॉक्स को अमरीका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की वॉशिंगटन स्थित प्रयोगशाला में भेजने का फैसला किया है.
AAIB की निगरानी में होगी जांच
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, NTSB की प्रयोगशाला में ब्लैक बॉक्स की जांच भारतीय अधिकारियों की निगरानी में होगी. अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत, हादसे की जांच की जिम्मेदारी उस देश की होती है जहां दुर्घटना हुई है. इसलिये, AAIB के साथ डेटा साझा किया जायेगा, और भारतीय अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी प्रोटोकॉल का पालन हो. ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालने की प्रक्रिया में दो दिन से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है, जो इसकी क्षति की गंभीरता पर निर्भर करता है.
हादसे की जांच में कई पहलुओं पर नजर
AAIB के नेतृत्व में चल रही जांच में गुजरात पुलिस, भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI), DGCA, और NTSB सहित कई एजेंसियां शामिल हैं. इसके अलावा, बोइंग और इंजन निर्माता GE के विशेषज्ञ भी जांच में सहयोग कर रहे हैं. जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या हादसे का कारण इंजन की खराबी, फ्लैप्स, लैंडिंग गियर, या कोई अन्य तकनीकी खामी थी. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विमान का आपातकालीन पावर सिस्टम (रैम एयर टरबाइन) हादसे से पहले सक्रिय हो गया था, जो इंजन या हाइड्रोलिक सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करता है.
बोइंग और एयर इंडिया पर सवाल
यह हादसा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर का पहला घातक हादसा है, जिसने वैश्विक स्तर पर इस विमान मॉडल की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. 2024 में बोइंग के व्हिसलब्लोअर सैम सालेहपौर ने 787 ड्रीमलाइनर के निर्माण में खामियों की चेतावनी दी थी, जिसे बोइंग ने खारिज कर दिया था. एयर इंडिया के चेयरपर्सन एन. चंद्रशेखरन ने दावा किया है कि विमान के दोनों इंजनों की स्थिति ठीक थी, और दाहिना इंजन मार्च 2025 में ही बदला गया था. फिर भी, DGCA ने एयर इंडिया के पूरे 787 बेड़े की अतिरिक्त सुरक्षा जांच का आदेश दिया है.
पीड़ितों और परिवारों का इंतजार
इस हादसे में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली, और एक कनाडाई नागरिक सहित 241 यात्रियों की मौत हुई. जमीन पर मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में भोजन कर रहे 33 लोगों की भी जान चली गई. एकमात्र जीवित बचे यात्री, ब्रिटिश-भारतीय मूल के विश्वास कुमार रमेश, जो सीट 11A पर थे, ने बताया कि उड़ान भरने के तुरंत बाद एक जोरदार धमाका हुआ था.
हादसे के बाद पीड़ितों की पहचान के लिये डीएनए जांच चल रही है, और परिवार जवाबों का इंतजार कर रहे हैं. ब्लैक बॉक्स से मिलने वाली जानकारी इस दुखद हादसे के कारणों को समझने में महत्वपूर्ण होगी.