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छत्तीसगढ़ में ACB–EOW की चार जिलों में छापेमारी

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29 अक्टू. 2025, 11:01 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

ACB–EOW
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रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले की जांच के तहत बुधवार सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EOW) की संयुक्त टीमों ने एक साथ कई जिलों में दबिश दी. रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और धमतरी में एक साथ की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है.


राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में टीम ने अशोक और अमित कोठारी के घर छापा मारा. दोनों कृषि कच्चा माल और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े हैं. अधिकारियों की टीम ने यहां से कई दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं.


राजनांदगांव में टीमों ने तीन व्यापारियों के ठिकानों पर दबिश दी. इनमें कोल माइंस कारोबारी राधाकृष्ण अग्रवाल, टेंट और सरकारी स्कूलों के सामान सप्लायर ललित भंसाली, और कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक आइटम सप्लायर यश नाहटा शामिल हैं. सभी के ठिकानों से दस्तावेजों की जांच जारी है.


दुर्ग के महावीर नगर स्थित कारोबारी नीलेश पारख के यहां जांच की गई. वहीं धमतरी जिले के सिर्री में ठेकेदार अभिषेक त्रिपाठी के घर करीब पाँच घंटे तक कार्रवाई चली. यह दबिश सुबह सात बजे शुरू हुई थी और DMF फंड से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के तहत की गई.


DMF फंड में अनियमितता का मामला


EOW की प्रारंभिक जांच के अनुसार, DMF फंड के जरिए सरकारी सप्लाई में भारी अनियमितताएं की गईं. टेंडर आवंटन में हेरफेर कर ठेकेदारों और बिचौलियों को फायदा पहुंचाया गया. बताया गया है कि कोरबा जिले में 575 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसकी पुष्टि ACB द्वारा रायपुर कोर्ट में पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई है.


जांच में सामने आया है कि DMF फंड के वर्क प्रोजेक्ट में नियमों को बदला गया, ताकि अधिक कमीशन वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा सके. घोटाले में शामिल अफसरों को तय प्रतिशत में कमीशन दिया गया-कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब इंजीनियर को 2%.


छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पर EOW ने IPC की धारा 120B और 420 के तहत केस दर्ज किया है. जांच में यह भी पाया गया है कि कई ठेकेदारों-जिनमें संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर शामिल हैं-ने मिलकर अवैध लाभ अर्जित किया.


फिलहाल किसी भी एजेंसी या अधिकारी की ओर से कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जांच दल सरकारी सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों और फंड ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की गहन पड़ताल में जुटा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP