छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्मांतरण पर हंगामा
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को कथित धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग के मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस मुद्दे को उठाते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा पर तीखे सवाल किए.
विधायक चन्द्राकर ने विधानसभा में सवाल किया कि प्रदेश में कई एनजीओ विदेशी फंडिंग का उपयोग कर धर्मांतरण करा रहे हैं. जशपुर जिले में सबसे ज्यादा मतांतरण के मामले सामने आ रहे हैं. मिशनरियों से जुड़ी शैक्षणिक संस्थानों को करोड़ों का अनुदान दिया जाता है, लेकिन उसकी ऑडिट नहीं कराई जाती. राज्य में मतांतरण और धर्म परिवर्तन के मामले बढ़ रहे हैं.
इसके जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया कि राज्य की 153 संस्थाओं को विदेशी फंडिंग मिल रही है. पहले राज्य में 364 संस्थानों को विदेशी फंडिंग मिलती थी. अब इनमें से 84 संस्थाओं की फंडिंग रोक दी गई है. जबकि 127 की वैधता समाप्त कर दी गई है.
चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण
उन्होंने यह भी बताया कि चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराए जाने की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है. इस साल अब तक चार मामले सामने आए हैं, जिस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है.
विधायक अजय चन्द्राकर ने सरकार से धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून लाने की मांग की.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में धर्म स्वातंत्र विधेयक 1968 लागू है. मौजूदा इस कानून में बदलाव की जरूरत है. ताकि विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जा सके.
धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून का ऐलान
इस पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा विधानसभा में ऐलान किया कि छत्तीसगढ़ सरकार धर्मांतरण रोकने के लिए देश का सबसे सख्त कानून लाएगी. इसे देश के सर्वश्रेष्ठ प्रावधानों के साथ लागू किया जाएगा.
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने यह भी बताया कि विदेशी फंडिंग की निगरानी केन्द्र सरकार करती है. हालांकि किसी संस्था के खिलाफ शिकायत मिलने पर राज्य सरकार भी जांच कर सकती है.
केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि बस्तर के 70 फीसदी गांवों में धर्मांतरण का खेल चल रहा है. इसमें सीधे तरीके से विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हो रहा है. यदि स्थिति ऐसी रहेगी तो आने वाले दिनों में हम आदिवासी राज्य नहीं रह जाएंगे.
इसके जवाब में गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में ऐसी 18 संस्थाएं हैं, जिन्हें विदेशी फंडिंग मिलती है. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण को रोकने मिलकर काम करना होगा.
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि पंद्रह दिनों के भीतर राजधानी में ही धर्म परिवर्तन के दो प्रकरण सामने आए हैं. जिस तरह से हिंदू समाज कोई आयोजन करता है तो उसकी अनुमति लेता है. क्या ऐसे समाज किसी धार्मिक आयोजन की सूचना देते हैं.
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह संभव ही नहीं है कि कोई अनुमति के बगैर आयोजन कर ले. सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रशासन से अनुमति जरूरी है. बगैर अनुमति के काम करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
पीडब्ल्यूडी और डीएमएफ फंड का भी मुद्दा उठा
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने पीडब्ल्यूडी और डीएमएफ फंड का मुद्दा उठाया.
चरणदास महंत ने कहा कि बिलासपुर के पीडब्ल्यूडी विभाग में मेंटेनेंस और बिजली में 100 करोड़ का भुगतान किया गया. 40-50 हजार रुपए की एसी 3 से 4 लाख में खरीदे गए.
इसके जवाब में डिप्टी सीएम साव ने बताया कि 9,156 जगहों पर मरम्मत कार्य किया गया. जिसमें 67 करोड़ रुपए खर्च हुआ है. अगर कहीं गलत ढंग से भुगतान हुआ है तो इसकी जानकारी दे दें.
इसके बाद कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने बस्तर में डीएमएफ मद और सीएसआर मद की राशि के खर्चे का मामला उठाया.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने खर्च के बारे में बताया. पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने इसे पिछली सरकार के वक्त का मामला बताया.
इससे लखेश्वर बघेल नाराज हो गए और कहा कि कोई काम मत करिए, कोई खर्च मत करिए, सिर्फ पिछले पांच साल के काम की जांच करवा लीजिए.