माओवादियों ने 8 परिवारों को गांव से निकाला
छत्तीसगढ़ माओवादियों ने 8 परिवारों को गांव से निकाला
दंतेवाड़ा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के दो गांवों के 8 परिवारों को माओवादियों ने गांव से बाहर निकाल दिया है.
ये ग्रामीण बारसूल थाना क्षेत्र के तुशवाल ग्राम पंचायत के हैं. इन ग्रामीणों पर माओवादियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया है. माओवादियों ने धमकी दी है कि वापस गांव लौटे तो जान से मार दिए जाओगे.
इस नक्सल फरमान के बाद ग्रामीण अपना घर, जमीन और मवेशी छोड़कर चले गए हैं.
इस संबंध में दंतेवाड़ा एएसपी आरके बर्मन ने कहा कि दो गांव के 8 परिवार गांव छोड़कर आए हैं.
माओवादियों ने गांव छोड़ने का फरमान जारी किया था. ये सभी अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं. पुलिस मामले की जानकारी ले रही है.
तुशवाल ग्राम पंचायत के अंतर्गत कोहकवाड़ा और तोड़मा गांव आते हैं. ये दोनों गांव दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिले की सरहद पर इंद्रावती नदी के पास स्थित हैं.
दोनों गांव नक्सल प्रभावित होने के साथ ही जिले के अंदरूनी इलाके में आते हैं. बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले गांव में करीब 50 की संख्या में हथियारबंद माओवादी पहुंचे थे.
माओवादियों ने गांव में जनअदालत लगाकर कोहकवाड़ा के 6 और तोड़मा के 2 परिवारों पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया था.
माओवादियों ने सैकड़ों ग्रामीणों के सामने कहा कि ये लोग पुलिस के लिए काम करते हैं.
थुलथुली मुठभेड़ में इन्हीं की वजह से उनके 38 साथियों की मौत हुई थी.
जनअदालत लगा सुनाया फरमान
इसके बाद माओवादियों ने 8 परिवारों को तत्काल गांव छोड़ने का फरमान जारी कर दिया.
गांव नहीं छोड़ने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी. माओवादियों के डर से ग्रामीण तत्काल गांव छोड़कर बारसूल पहुंचे.
ग्रामीणों में डर इतना था कि जल्दबाजी में वे अपनी जरूरत का सामान ही ला पाए हैं.
बारसूल से कुछ ग्रामीण बस्तर जिले के किलेपाल में अपने रिश्तेदारों के घर चले गए.
वहीं कुछ ग्रामीण दंतेवाड़ा जिले के पनेड़ा और वाहनरपुर भी गए हैं.
पूरे गांव में थी दहशत
पीड़ित परिवारों ने बताया कि जनअदालत के दिन कंपनी 6 की डीवीसी निर्मला, ललिता, पाकलू, रामधर और राजेश जैसे 50 से 60 माओवादी गांव पहुंचे थे.
उस दिन पूरे गांव में दहशत का माहौल था. उन्हें डर था कि कहीं माओवादी मौत का फरमान ना सुना दें.
किसी को भी माओवादियों के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं हुई.
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि माओवादियों ने हम पर झूठा आरोप लगाया है.
हम लोग पुलिस के लिए काम नहीं करते हैं. हम सिर्फ खेती-किसानी कर अपना परिवार चलाते हैं.
माओवादियों ने बिना सबूत के उन्हें गांव छोड़ने की सजा सुना दी.