किसान यूनिक आईडी बनाने लंबी कतार, पर नहीं हो रहा काम
छत्तीसगढ़ में किसान यूनिक आईडी बनाने लंबी कतार, पर नहीं हो रहा काम
रायपुर | संवाददाताः केन्द्र सरकार द्वारा किसानों को आधार कार्ड की तरह एक यूनिक आईडी देने लिए किसान पंजीयन कराया जा रहा है. लेकिन प्रदेश के जांजगीर-चांपा जिले में तकनीकी खामियों के कारण पंजीयन का काम पिछड़ता जा रहा है.
बार-बार पोर्टल के बंद हो जाने के कारण काम धीमी गति से चल रहा है.
जिसके चलते सीएससी सेन्टर में रोज किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन उनका काम नहीं हो रहा है.
किसान पंजीयन के लिए सरकार द्वारा प्रदेश के सभी ब्लॉकों के सीएससी सेन्टर और कामन च्वाईस सेन्टर आदि को अधिकृत किया गया है.
पंजीयन का काम तो शुरू हो गया है. सभी गांवों में मुनादी करा किसानों को सूचना भी दे रहे हैं.
सूचना मिलते ही किसान पंजीयन कराने सीएससी सेन्टर पहुंच रहे हैं. लेकिन पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण काम ठीक से नहीं हो पा रहा है.
बार-बार पोर्टल के बंद हो जाने से किसान परेशान हो रहे हैं.
ऑनलाइन रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं
जिले के अधिकांश किसानों का रिकॉर्ड ही ऑनलाइन दुरुस्त नहीं हुआ है.
जबकि पंजीयन के लिए रिकॉर्ड ऑनलाइन दुरुस्त होना जरुरी है. प्रक्रिया के आगे नहीं बढ़ने का एक वजह यह भी है.
जिन किसानों का पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त है ऐसे किसानों का रकबा खसरा नंबर डालते ही पूरा डिटेल पोर्टल पर आ जाता है.
ऐसे किसानों का ही पंजीयन शीध्र हो पा रहा है.
पटवारी-तहसीलदार से मंजरी जरूरी
किसानों का पंजीयन कराने के लिए सीएससी संचालक पहले चरण में रिकार्ड का सत्यापन करते हैं.
इसके बाद यही डाटा पटवारी के पास ऑनलाइन भेजा जाता है. जहां पटवारी भौतिक सत्यापन करते हैं.
उसके बाद वेरीफिकेशन के लिए तहसीलदार के आईडी में पहुंचता है. जहां पर तहसीलदार उसे मंजूरी देते हैं.
उसके बाद ही पंजीयन पूरा हो पाता है. लेकिन इन दिनों पंजीयन का काम अधिक होने के कारण सर्वर पूरी तरह से डाउन चल रहा है.
जिसके चलते पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है. एक बार पोर्टल बंद हुआ तो फिर से उसी प्रक्रिया को दोबारा करना पड़ता है.
किसानों के लिए है फायदेमंद
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान पंजीयन कराना अनिवार्य है.
वर्तमान में किसी भी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए सर्वे कराना पड़ता है.
लेकिन किसान कार्ड बन जाने से सर्वे कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. क्योंकि पहले ही किसान पंजीकृत हो चुके होंगे.
पीएम किसान सहित केसीसी लोन, फसल बीमा सहित अन्य प्रकार के योजनाओं का लाभ मिलेगा.
इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए किसानों का स्वतः रजिस्ट्रेशन हो जाएगा. बार-बार सत्यापन या रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा.
किसानों को चिंता है कि अगर समय पर पंजीकरण नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अगली किश्त भी नहीं मिल पाएगी.
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए.
अब तक 4 प्रतिशत पंजीयन
जिले में अब तक पांच ब्लॉक में औसतन पंजीयन केवल 4 प्रतिशत तक ही हुआ है.
पांचों ब्लॉकों में सबसे ज्यादा पंजीयन नवागढ़ ब्लॉक में हुआ है.
यहां 41993 किसानों का पंजीयन कराने का लक्ष्य है. जिसमें से अब तक 2205 किसानों का ही पंजीयन हुआ है.
इसके बाद बलौदा ब्लॉक का नंबर आता है. जहां 14772 किसानों में 1640 किसानों का ही पंजीयन हुआ है.
इसी तरह अकलतरा ब्लॉक में 22347 में से 785 किसानों ने पंजीयन कराया है.
यही हाल पामगढ़ ब्लॉक में है. यहां के 26218 में से 423 किसान ही पंजीयन करा पाए हैं.
बम्हनीडीह ब्लॉक में तो स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. यहां के 21428 किसानों में से सिर्फ 235 किसानों ने ही पंजीयन कराया है.