चीन खदान विस्फोट में 82 मरे, 128 अस्पताल में, 35 सुरक्षित तथा 2 लापता
बीजिंग । डेस्क: चीन के मध्य प्रांत शांक्सी (Shanxi) में एक दर्दनाक कोयला खदान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. प्रांत के किनयुआन (Qinyuan) काउंटी में स्थित लियुशेनयु कोयला खदान (Liushenyu Coal Mine) में हुए एक भीषण गैस विस्फोट में कम से कम 82 खनिकों की मौत हो गई है. बीजिंग से लगभग 520 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस खदान में यह हादसा शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे हुआ.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट के समय खदान के भीतर कुल 247 कर्मचारी काम कर रहे थे. चीनी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मलबे और धुएं से बचाए गए लोगों में से 128 घायल खनिकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से 2 की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. वहीं, 35 कर्मचारी सुरक्षित अपने घर लौटने में सफल रहे हैं, जबकि 2 खनिक अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है.
मौतों के आंकड़ों को लेकर शुरू में रहा भ्रम
चांगझी (Changzhi) शहर के अधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौतों का आंकड़ा 82 होने की पुष्टि की. हालांकि, इससे पहले सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ और सीसीटीवी (CCTV) ने मरने वालों की संख्या 90 से अधिक बताई थी. शिन्हुआ के अनुसार, आंकड़ों में यह विसंगति इसलिए आई क्योंकि खदान संचालक कंपनी के पास ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की सटीक संख्या (Head Count) का सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था. शुरुआती रिपोर्टों में केवल आठ लोगों की मौत की बात कही गई थी, जिसके बाद मौतों के आंकड़ों में अचानक हुई इस भारी वृद्धि ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जहरीली गैस और धुएं के कारण दम घुटने से हुईं मौतें
चिकित्सकों और बचावकर्मियों के अनुसार, खदान में मारे गए अधिकांश लोगों की मौत का मुख्य कारण विस्फोट के बाद फैली जहरीली गैस और भारी धुएं के चलते दम घुटना है. अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि जीवित बचे लोगों को टॉक्सिक गैस के प्रभाव से बचाने के लिए हाई-प्रेशर ऑक्सीजन थेरेपी दी जा रही है. इसके साथ ही, जीवित बचे खनिकों के मानसिक आघात को कम करने के लिए किनयुआन पीपुल्स हॉस्पिटल में मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं की भी तैनाती की गई है.
हादसे में घायल हुए एक खनिक वांग योंग ने अस्पताल से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "विस्फोट के समय मुझे कोई आवाज तो नहीं सुनाई दी, लेकिन अचानक हर तरफ धुएं का गुबार छा गया और सल्फर की तेज गंध आने लगी. यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे कोई बारूद फटा हो. मैंने सबको भागने के लिए कहा, लेकिन भागते-भागते कई लोग धुएं के कारण गिरने लगे और मैं भी बेहोश हो गया." वांग ने बताया कि वह करीब एक घंटे बाद होश में आए और अन्य खनिकों को जगाकर सुरक्षित बाहर निकले.
पुराना नक्शा और पानी का बढ़ता जलस्तर बना चुनौती
इस बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे बचाव अभियान में 400 से अधिक राहतकर्मी और 7 विशेषज्ञ चिकित्सा टीमें जुटी हुई हैं. आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने भी छह विशेष खदान बचाव टीमों के 345 कर्मियों को मौके पर भेजा है. हालांकि, खदान शाफ्ट की अत्यधिक गहराई और खड़ी ढलान के कारण घायलों को बाहर निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इसके अतिरिक्त, बचावकर्मियों को खदान के भीतर पानी का स्तर बढ़ने का भी डर सता रहा है, जो संभवतः विस्फोट में पानी के पाइप या पंपिंग सिस्टम के क्षतिग्रस्त होने का संकेत है. सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि खदान मालिकों द्वारा प्रदान किया गया ब्लूप्रिंट (नक्शा) खदान के वास्तविक लेआउट से मेल नहीं खा रहा था, जिसके कारण बचाव दल को मौके पर ही नई योजनाएं तैयार करनी पड़ रही हैं.
सुरक्षा नियमों की अनदेखी और कंपनी अधिकारियों की गिरफ्तारी
विस्फोट के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए खदान का संचालन करने वाली कंपनी 'शांक्सी टोंगझोउ ग्रुप लियुशेनयु कोल इंडस्ट्री' के शीर्ष अधिकारियों को हिरासत में ले लिया है. व्यावसायिक सूचना प्लेटफॉर्म 'तियान्यानचा' के अनुसार, इस खदान को पिछले साल ही सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के लिए दो बार प्रशासनिक दंड का सामना करना पड़ा था. इन उल्लंघनों में मोनोरेल पर लगे इमरजेंसी स्टॉप मैकेनिज्म का फेल होना और कमजोर छत वाले क्षेत्रों को उचित सपोर्ट न देना शामिल था.
यह खदान 2010 में स्थापित हुई थी और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.2 मिलियन टन है. इसे 'हाई-गैस खदान' श्रेणी में रखा गया था, जिसका अर्थ है कि इसमें मीथेन जैसी खतरनाक गैसों का स्तर हमेशा उच्च रहता है, फिर भी सुरक्षा को लेकर बड़ी कोताही बरती गई.
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दिए सख्त जांच के आदेश
इस दशक के सबसे भीषण खदान हादसों में से एक पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए बचावकर्मियों को "हर संभव प्रयास" करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि हादसे के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी जवाबदेही तय की जाएगी. राष्ट्रपति ने देश के सभी विभागों को इस घटना से सबक लेने, कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने और सभी प्रकार के जोखिमों की गहन जांच करने को कहा है.
प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी इस संदेश को दोहराते हुए कहा कि दुर्घटना के कारणों की जल्द से जल्द जांच की जानी चाहिए. इस बीच, वैश्विक स्तर पर भी इस हादसे पर संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, किर्गिज राष्ट्रपति सद्यर जापारोव और जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची सहित कई विश्व नेताओं ने चीन को अपनी संवेदनाएं भेजी हैं.